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अमेरिका का सख्त रुख: ट्रंप की ईरान को खुली सैन्य चेतावनी

जर्मनी पर 'डबल अटैक' से दुनिया भर में मची खलबली

वाशिंगटन (अंतरराष्ट्रीय डेस्क): अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के पटल पर सोमवार को एक बड़ा भूचाल देखने को मिला। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ (America First) विदेश नीति को और अधिक आक्रामक बनाते हुए एक साथ दो मोर्चों पर बेहद कड़े कदम उठाए हैं। एक तरफ जहां उन्होंने मध्य पूर्व में ईरान को खुली सैन्य चेतावनी दी है, वहीं दूसरी तरफ अपने पुराने यूरोपीय सहयोगी जर्मनी पर कड़े आर्थिक और सामरिक फैसले लेते हुए ‘डबल अटैक’ (दोहरा प्रहार) किया है। ट्रंप प्रशासन के इन अप्रत्याशित और सख्त फैसलों से मध्य पूर्व से लेकर पूरे यूरोप तक भारी खलबली मच गई है।

ईरान को ट्रंप की दो-टूक चेतावनी: “सुधरें या परिणाम भुगतें”
ईरान को लेकर ट्रंप का रुख अब तक के सबसे कड़े स्तर पर पहुंच गया है। हाल ही में ईरान द्वारा मध्यस्थों के जरिए पेश किए गए 14-सूत्रीय शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज करने के बाद, राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस से एक स्पष्ट बयान जारी किया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने अपने गुप्त यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) कार्यक्रम और क्षेत्र में प्रॉक्सी आतंकी गुटों को समर्थन देने पर तत्काल रोक नहीं लगाई, तो अमेरिका ‘निर्णायक सैन्य कार्रवाई’ (Decisive Military Action) करने से जरा भी पीछे नहीं हटेगा। ट्रंप ने साफ किया है कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। इस कड़े बयान के बाद फारस की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना की गश्त और बढ़ा दी गई है, जिससे वैश्विक तेल बाजारों में दहशत का माहौल है।

जर्मनी पर ट्रंप का ‘डबल अटैक’: सेना की वापसी और कड़े टैरिफ
अंतरराष्ट्रीय मंच पर सबसे ज्यादा हैरानी ट्रंप के जर्मनी को लेकर लिए गए कड़े फैसलों से हुई है।

पहला प्रहार (सामरिक): ट्रंप प्रशासन ने जर्मनी में तैनात लगभग 15,000 अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। ट्रंप ने साफ शब्दों में आरोप लगाया है कि जर्मनी नाटो (NATO) के रक्षा बजट में अपने हिस्से का पर्याप्त योगदान नहीं दे रहा है और अमेरिका अब “दूसरों की सुरक्षा का मुफ्त में खर्च नहीं उठाएगा।”

दूसरा प्रहार (आर्थिक): दूसरे बड़े आर्थिक झटके के रूप में, ट्रंप ने जर्मनी सहित यूरोपीय यूनियन से आयात होने वाली कारों और ऑटो पार्ट्स पर 25 प्रतिशत का भारी-भरकम आयात शुल्क (Tariff) लगाने की घोषणा कर दी है। ट्रंप का कहना है कि यूरोपीय देशों के व्यापारिक नियम अमेरिकी ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए बेहद अनुचित और पक्षपाती हैं।

यूरोप की अर्थव्यवस्था और नाटो की एकजुटता पर बड़ा खतरा
इस ‘डबल अटैक’ ने यूरोपीय यूनियन और विशेष रूप से जर्मनी की चिंताएं बढ़ा दी हैं। जर्मनी की अर्थव्यवस्था काफी हद तक अपने ऑटोमोबाइल निर्यात पर निर्भर है। मर्सिडीज (Mercedes), बीएमडब्ल्यू (BMW) और फॉक्सवैगन (Volkswagen) जैसी जर्मन कंपनियों के लिए अमेरिका एक बहुत बड़ा बाजार है। 25% का टैरिफ लगने से इन कंपनियों को अरबों डॉलर का नुकसान झेलना पड़ेगा। दूसरी ओर, सैनिकों की वापसी से यूरोप में नाटो की एकजुटता और रूस के खिलाफ उसकी रणनीतिक मजबूती पर भी गहरे सवाल खड़े हो गए हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप के इन एकतरफा और कड़े फैसलों ने वैश्विक कूटनीति में एक नया और अस्थिर दौर शुरू कर दिया है। जहां ईरान के साथ तनाव से कच्चे तेल के दाम आसमान छूने लगे हैं, वहीं यूरोप के साथ छिड़े इस नए ‘व्यापार युद्ध’ (Trade War) की आहट ने वैश्विक शेयर बाजारों को भी लाल निशान पर धकेल दिया है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि यूरोपीय यूनियन और ईरान अमेरिका के इस आक्रामक कदम का क्या कूटनीतिक या सामरिक जवाब देते हैं।

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