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जंतर-मंतर प्रदर्शन: छात्रों पर पुलिस की बर्बर कार्रवाई को लेकर लोकसभा में भारी हंगामा

विपक्ष ने की गृह मंत्री अमित शाह से इस्तीफे और माफी की मांग

राघवेन्द्र प्रताप सिंह/ नई दिल्ली: राजधानी नई दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए छात्र प्रदर्शनों और उन पर पुलिस की कथित दमनकारी कार्रवाई को लेकर अब संसद के मानसून सत्र में भारी घमासान छिड़ गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विभिन्न वामपंथी छात्र संगठनों द्वारा किए गए इस लंबे विरोध प्रदर्शन का अंत जिस नाटकीय और विवादास्पद तरीके से हुआ, उसने राजनीतिक पारे को चरम पर पहुंचा दिया है। मंगलवार को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों के सांसदों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेर लिया।

सदन के भीतर का नजारा बेहद तनावपूर्ण था। विपक्षी सांसद हाथों में तख्तियां लेकर वेल (Well of the House) में आ गए और दिल्ली पुलिस तथा केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विपक्ष के नेता ने स्थगन प्रस्ताव (Adjournment Motion) का नोटिस देते हुए मांग की कि सदन के सभी काम रोककर तुरंत इस ‘पुलिसिया बर्बरता’ पर चर्चा की जाए। विपक्षी नेताओं का सीधा आरोप है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों की मांग कर रहे छात्रों पर पुलिस ने आधी रात को लाठीचार्ज किया, उन्हें घसीटा और कई महिला छात्राओं के साथ बदसलूकी की गई। विपक्ष ने इसके लिए सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके इस्तीफे और सार्वजनिक माफी की मांग की है।

गौरतलब है कि CJP और अन्य छात्र संगठनों ने नीट (NEET) 2026 पेपर लीक मामले, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में कथित अनियमितताओं और शिक्षा प्रणाली के निजीकरण के विरोध में जंतर-मंतर पर एक महीने से अधिक समय तक धरना दिया था। देश भर से हजारों छात्र इस आंदोलन से जुड़े थे। लेकिन 25 जुलाई को CJP के शीर्ष नेतृत्व ने अचानक इस प्रदर्शन को वापस लेने की घोषणा कर दी। CJP का दावा था कि सरकार ने उन्हें गिरफ्तार छात्रों की रिहाई, दर्ज एफआईआर (FIR) वापस लेने और पेपर लीक पीड़ितों को उचित मुआवजा देने का ‘मौखिक आश्वासन’ दिया है।

हालांकि, CJP के इस एकतरफा फैसले की अन्य सहयोगी छात्र संगठनों द्वारा अब कड़ी आलोचना की जा रही है। उनका आरोप है कि पुलिस के दबाव और सरकार के झूठे वादों के आगे CJP का नेतृत्व झुक गया। लोकसभा में विपक्षी सांसदों ने इसी मुद्दे को उठाते हुए कहा कि जिन छात्रों को मनमाने ढंग से हिरासत में लिया गया था, उन्हें अभी तक पूरी तरह से कानूनी राहत नहीं मिली है।

दूसरी ओर, सरकार ने पुलिस की कार्रवाई का बचाव किया है। संसदीय कार्य मंत्री ने हंगामा कर रहे विपक्ष को जवाब देते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों ने तय समय-सीमा और अनुमति वाले क्षेत्र का उल्लंघन किया था, जिससे आम जनता को भारी असुविधा हो रही थी। सरकार का तर्क है कि कानून व्यवस्था (Law and Order) बनाए रखने के लिए पुलिस को न्यूनतम बल प्रयोग कर इलाके को खाली कराना पड़ा। सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर छात्रों को भड़काने और एक संवेदनशील शैक्षणिक मुद्दे का राजनीतिकरण करने का भी आरोप लगाया है। इस तीखी बहस और हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही को दिन भर के लिए कई बार स्थगित करना पड़ा।

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