राष्ट्रमंडल खेल पदक विजेता भारोत्तोलकों का सम्मान, मांडविया बोले- युवाओं को खेलों के लिए करें प्रेरित

नई दिल्ली : केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने यहां सोमवार को राष्ट्रमंडल खेल 2026 में शानदार प्रदर्शन करने वाले भारतीय भारोत्तोलकों को सम्मानित किया। उन्होंने ग्लासगो में ऐतिहासिक प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों की सराहना करते हुए कहा कि अब उनकी जिम्मेदारी केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें स्कूलों और कॉलेजों में जाकर युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित भी करना चाहिए।
राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय भारोत्तोलकों ने 11 भार वर्गों में हिस्सा लेते हुए एक स्वर्ण, छह रजत और एक कांस्य सहित कुल आठ पदक जीते। इस दौरान भारतीय खिलाड़ियों ने कई राष्ट्रमंडल खेल और राष्ट्रमंडल रिकॉर्ड भी बनाए, जबकि कई खिलाड़ियों ने अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किए।
डॉ. मांडविया ने स्वर्ण पदक विजेताओं को 30 लाख रुपये, रजत पदक विजेताओं को 20 लाख रुपये और कांस्य पदक विजेताओं को 10 लाख रुपये की नकद पुरस्कार राशि प्रदान की।
खिलाड़ियों को बधाई देते हुए डॉ. मांडविया ने कहा, “पूरा देश आपकी उपलब्धियों का जश्न मना रहा था। संसद में भी जब-जब आपने पदक जीते, तब-तब इसकी घोषणा की गई। वे पल हर भारतीय के लिए गर्व के क्षण थे।”
उन्होंने खिलाड़ियों के साथ मौजूद द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित कोच विजय शर्मा सहित सभी प्रशिक्षकों की भी विशेष सराहना की। उन्होंने कहा, “एक खिलाड़ी की सफलता में गुरु की सबसे बड़ी भूमिका होती है। चैंपियन तैयार करने में कोच के योगदान से बड़ा कोई योगदान नहीं हो सकता।”
डॉ. मांडविया ने कहा कि ओलंपिक रजत पदक विजेता मीराबाई चानू ने लगातार तीसरी बार राष्ट्रमंडल खेलों का स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वहीं ऋषिकांत सिंह और वल्लुरी अजय बाबू ने स्नैच में नए राष्ट्रमंडल खेल रिकॉर्ड बनाए। ज्ञानेश्वरी यादव और हरजिंदर कौर सहित कई खिलाड़ियों ने अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज कर यह साबित किया कि भारतीय भारोत्तोलन लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा लेने वाले 11 भारतीय भारोत्तोलकों में से छह खिलाड़ी खेलो इंडिया एथलीट (केआईए) हैं। पदक विजेताओं में ज्ञानेश्वरी यादव खेलो इंडिया एथलीट हैं, जबकि बिंदियारानी देवी, हरजिंदर कौर समेत कई खिलाड़ी भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई) पटियाला में प्रशिक्षण लेते हैं। उन्होंने कहा कि यह देश की जमीनी स्तर से लेकर उच्च प्रदर्शन तक की खेल विकास प्रणाली की सफलता का प्रमाण है।
खिलाड़ियों से देशभर के युवाओं को प्रेरित करने का आह्वान करते हुए डॉ. मांडविया ने कहा, “आपकी संघर्ष और सफलता की कहानियां हजारों बच्चों को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित कर सकती है। आप स्कूलों और कॉलेजों में जाएं और युवाओं को खेल अपनाने के लिए प्रेरित करें। हम सभी मिलकर भारत को एक सच्चा खेल महाशक्ति राष्ट्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।”
सम्मान समारोह के दौरान खेल मंत्री ने खिलाड़ियों से उनके संघर्ष, पदक तक के सफर और भविष्य की योजनाओं, विशेषकर एशियाई खेल 2026, को लेकर भी चर्चा की। खिलाड़ियों ने अपने कठिन दौर, राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविरों, अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और देश के लिए आगे भी पदक जीतने के संकल्प को साझा किया।
जो खिलाड़ी पदक जीतने से चूक गए, उनका भी हौसला बढ़ाते हुए डॉ. मांडविया ने कहा, “एक खिलाड़ी कभी वास्तव में हारता नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण बात लगातार बेहतर बनने का जुनून है। मुझे विश्वास है कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आशीर्वाद और 140 करोड़ भारतीयों का समर्थन हमेशा आपके साथ है।”
भारतीय खेलों के दीर्घकालिक विकास पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “इनमें से कई पदक विजेता खेलो इंडिया जैसी योजनाओं के माध्यम से आगे बढ़े हैं, जहां खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय कोचिंग, वैज्ञानिक सहयोग और प्रतिस्पर्धी अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं। देश ने आप पर निवेश इसलिए किया है क्योंकि उसे आपकी क्षमता पर विश्वास है। भारतीय खिलाड़ियों को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों से प्रतिस्पर्धा करने के लिए हर संभव सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।”



