संयुक्त राष्ट्र में भारत का दोटूक बयान: ‘कुछ चुनिंदा देशों के स्वार्थ की वजह से UNSC सुधार प्रक्रिया को बंधक नहीं बनाया जा सकता’

विवेक ओझा
संयुक्त राष्ट्र / नई दिल्ली

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में लंबे समय से लंबित स्थायी सदस्यता और व्यापक सुधारों को लेकर भारत ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर बेहद सख्त और कड़ा रुख अपनाया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में बोलते हुए भारतीय प्रतिनिधि ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वैश्विक शांति और सुरक्षा बनाए रखने वाली सर्वोच्च संस्था (UNSC) की सुधार प्रक्रिया को कुछ चुनिंदा देशों के विभाजनकारी और संकीर्ण स्वार्थों की बंधक (Hostage) नहीं बनने दिया जा सकता।

भारत ने कहा कि 21वीं सदी की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं और चुनौतियों से निपटने में 1945 का पुराना ढांचा पूरी तरह से विफल साबित हो रहा है। बहुपक्षवाद (Multilateralism) में वैश्विक विश्वास तभी बहाल हो सकता है जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में विकासशील देशों, विशेष रूप से अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका को स्थायी और उचित प्रतिनिधित्व मिले। भारत ने इशारों-इशारों में वीटो पावर (Veto Power) का दुरुपयोग करने वाले और सुधारों में अड़ंगा अटकाने वाले स्थायी सदस्य देशों (चीन आदि) पर निशाना साधा।

भारतीय कूटनीतिज्ञों ने ज़ोर देकर कहा कि ‘अंतर-सरकारी वार्ता’ (IGN) की प्रक्रिया केवल समय बिताने का जरिया बनकर रह गई है और अब ठोस पाठ-आधारित वार्ता (Text-based negotiations) शुरू करने का समय आ गया है। भारत के इस रुख को G4 देशों (भारत, जापान, जर्मनी, ब्राजील) और अफ्रीकी संघ का व्यापक समर्थन मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुरक्षा परिषद में जल्द लोकतांत्रिक बदलाव नहीं किए गए, तो वैश्विक शांति बनाए रखने में इस संस्था की प्रासंगिकता हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी।

Related Articles

Back to top button