झारखंड में एक करोड़ रुपये का इनामी शीर्ष माओवादी मिसिर बेसरा गिरफ्तार

राँची ( इंडियन व्यू टीम) : झारखंड में सुरक्षा बलों ने नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता हासिल की है। प्रमुख माओवादी नेता और पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा को धनबाद-गिरिडीह सीमा से गिरफ्तार किया गया है। उस पर 1 करोड़ रुपये का इनाम था। क्षेत्रीय समिति सदस्य मेहनत उर्फ मोछू, माओवादी कार्यकर्ता गौरव और दो ग्रामीणों को भी संयुक्त अभियान के दौरान गिरफ्तार किया गया। मोछू पर 15 लाख रुपये का इनाम था। यह कार्रवाई कोबरा, सीआरपीएफ और झारखंड पुलिस ने विशिष्ट खुफिया सूचनाओं के आधार पर की।
नक्सल / माओवाद मुक्त भारत की तरफ बड़ा क़दम: 31 मार्च 2026 को भारत ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। लगभग छह दशकों की हिंसा के बाद, देश वामपंथी उग्रवाद के चंगुल से प्रभावी रूप से मुक्त हो गया। यह उपलब्धि सरकार के बारह वर्षों के निरंतर प्रयासों का परिणाम है। इस परिवर्तन का मार्गदर्शन ‘विश्वास’, ‘निर्माण’ और ‘जन कल्याण’ के स्तंभों द्वारा किया गया। एक संतुलित रणनीति के तहत निर्णायक सुरक्षा कार्रवाइयों को विकास और कल्याणकारी पहलों के साथ जोड़ा गया। प्रौद्योगिकी-सक्षम उपायों ने खुफिया जानकारी, निगरानी और समन्वय को मजबूत किया। पुनर्वास नीतियों ने हजारों नक्सलियों को आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया। इन प्रयासों ने बुनियादी ढाँचे का विस्तार किया और सार्वजनिक सेवाओं तक पहुँच में सुधार किया। उन्होंने शासन व्यवस्था के प्रति विश्वास बहाल किया और लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूत किया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन प्रयासों की बदौलत हिंसा के सभी प्रमुख संकेतकों में तेजी से और निरंतर गिरावट आई है। नक्सल मुक्त भारत की यह सफलता दीर्घकालिक शांति और विकास के लिए समग्र सरकार के दृष्टिकोण की शक्ति को दर्शाती है।
भारत को नक्सलवाद के भय और हिंसा से मुक्त करने के लक्ष्य को केंद्रित योजना और समन्वित कार्रवाई के माध्यम से प्राप्त किया गया। 24 अगस्त 2024 को भारत सरकार ने देश को 31 मार्च 2026 तक नक्सल-मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया। तेज़ किए गए सुरक्षा अभियानों, पुख्ता समन्वय, अवसंरचना का विस्तार और त्वरित विकास आउटरीच के जरिए यह लक्ष्य समय पर प्राप्त हुआ।
साल 2014 से पहले जहाँ चाक-चौबंद सुरक्षा वाले केवल 66 पुलिस थाने थे, वहीं बाद में यह संख्या बढ़कर 597 हो गई। नक्सली घटनाओं की रिपोर्ट करने वाले पुलिस थानों की संख्या 333 से घटकर 16 रह गई। इसके अतिरिक्त, पिछले सात वर्षों में सुरक्षा ढाँचे को और मजबूत करने के लिए 408 नए सीएपीएफ शिविर स्थापित किए गए, क्षेत्र पर नियंत्रण बढ़ा और दूरस्थ वन क्षेत्रों में निरंतर अभियान संभव हो सका। दूरस्थ क्षेत्रों में तेज़ तैनाती, जवानों की आवाजाही, घायल कर्मियों को निकालने और निगरानी के लिए (68 नाइट-लैंडिंग हेलीपैड) भी बनाए गए। सुरक्षा बलों को 400 बुलेट-प्रूफ और ब्लास्ट-प्रूफ वाहन प्रदान किए गए तथा उनके कल्याण और चिकित्सा सहायता के लिए 5 अस्पतालों का निर्माण किया गया।
कोबरा (कमांडो बटालियन फॉर रेज़ोल्यूट एक्शन), सीआरपीएफ, डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी),तथा झारखंड जैगुआर, छत्तीसगढ़ पुलिस इकाइयों और आंध्र प्रदेश के ग्रेहाउंड्स जैसे विशिष्ट राज्य स्तरीय बलों को शामिल करते हुए स्तरीय या लेयर्ड और विशेषीकृत सुरक्षा ढाँचा विकसित किया गया। डीआरजी, एसटीएफ, सीआरपीएफ और कोबरा के बीच संयुक्त प्रशिक्षण के माध्यम से एक एकीकृत और अंतर-संचालनीय बल तैयार किया गया, जिसमें एक स्पष्ट और सुव्यवस्थित कमांड संरचना स्थापित की गई।
सरकार के “ट्रेस, टारगेट, न्यूट्रलाइज़” (यानी पता लगाने, लक्ष्य साधने और समाप्त करने) के सिद्धांत के उल्लेखनीय परिणाम सामने आए । निरंतर सुरक्षा अभियानों और लक्षित खुफिया-आधारित रणनीतियों के माध्यम से, सरकार ने उन क्षेत्रों को पुनः अपने नियंत्रण में लिया, जो तीन दशकों से अधिक समय से वामपंथी उग्रवाद के प्रभाव में थे।



