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स्कूली शिक्षा में बड़े सुधार की तैयारी: सरकार ने विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता के मूल्यांकन के लिए जारी किए नए दिशा-निर्देश

पल्लवी श्रीवास्तव/ नई दिल्ली: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के सफल क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा मंत्रालय लगातार ठोस कदम उठा रहा है। इसी क्रम में, पीआईबी की ताज़ा जानकारी के अनुसार, सरकार ने देश भर के विद्यालयों में प्रदान की जाने वाली शिक्षा की गुणवत्ता का निरंतर और समग्र मूल्यांकन (Evaluation) करने के लिए नए ढांचे की रूपरेखा पेश की है। इसका मुख्य उद्देश्य रटंत विद्या (Rote learning) को खत्म कर छात्रों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान केंद्रित करना है।

इस नई मूल्यांकन प्रणाली के तहत केवल छात्रों के परीक्षा परिणाम ही नहीं, बल्कि स्कूल के बुनियादी ढांचे, शिक्षकों की योग्यता एवं उनके पढ़ाने के तरीके, और समावेशी शिक्षा के मानकों का भी बारीकी से आकलन किया जाएगा। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि मूल्यांकन का उद्देश्य स्कूलों को दंडित करना नहीं है, बल्कि उनकी कमियों की पहचान कर उन्हें सुधारने के लिए आवश्यक संसाधन और मार्गदर्शन प्रदान करना है। इसके लिए ‘परख’ (PARAKH – Performance Assessment, Review, and Analysis of Knowledge for Holistic Development) जैसे राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्रों की भूमिका को और बढ़ाया जा रहा है।

सरकारी स्कूलों के साथ-साथ निजी स्कूलों में भी शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर एक पारदर्शी मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया जा रहा है। बच्चों के बौद्धिक विकास के साथ-साथ उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, कला, खेल और नैतिक मूल्यों की शिक्षा को भी इस मूल्यांकन ढांचे में अहमियत दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि गुणवत्ता मूल्यांकन की यह नियमित प्रक्रिया भारत के स्कूली शिक्षा तंत्र में वैश्विक स्तर का सुधार लाएगी और छात्रों को 21वीं सदी की चुनौतियों के लिए तैयार करेगी।

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