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हेपेटाइटिस से निपटने के लिए भारत की मजबूत लड़ाई: स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी किए अहम आंकड़े, जागरूकता पर जोर

अभिषेक सिंह/ नई दिल्ली: विश्व हेपेटाइटिस दिवस (28 जुलाई) के अवसर पर भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने इस गंभीर और जानलेवा बीमारी से निपटने के लिए देश की प्रतिबद्धता और अब तक की उपलब्धियों पर एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की है। पीआईबी (PIB) की हालिया प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ‘हेपेटाइटिस से निपटने के लिए भारत की लड़ाई’ अब एक जन-आंदोलन का रूप ले चुकी है। सरकार ने ‘राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम’ (NVHCP) के तहत देश भर में मुफ्त जांच और उपचार की सुविधाओं का व्यापक विस्तार किया है।

हेपेटाइटिस, जो मुख्य रूप से लिवर को प्रभावित करता है और कई मामलों में लिवर कैंसर का कारण बनता है, भारत के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती रहा है। विज्ञप्ति में बताया गया है कि सरकार ने हेपेटाइटिस बी के खिलाफ टीकाकरण अभियान को ‘मिशन इंद्रधनुष’ के तहत और अधिक गति दी है, ताकि हर नवजात को यह जीवनरक्षक टीका समय पर मिल सके। इसके अलावा, गर्भवती महिलाओं में हेपेटाइटिस की स्क्रीनिंग को भी अनिवार्य किया जा रहा है ताकि मां से बच्चे में होने वाले संक्रमण को रोका जा सके।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने आम जनता से अपील की है कि वे इस बीमारी के लक्षणों को पहचानें और समय पर जांच कराएं। देश के सभी जिला अस्पतालों में वायरल हेपेटाइटिस के प्रबंधन के लिए विशेष मॉडल ट्रीटमेंट सेंटर (MTC) स्थापित किए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस को एक सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में पूरी तरह से समाप्त करना है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के वैश्विक लक्ष्यों के भी अनुरूप है। यह विज्ञप्ति पीआईबी पोर्टल पर सबसे ज्यादा देखी जाने वाली (Most Viewed) खबरों में शामिल है, जो इस विषय पर जनता की बढ़ती जागरूकता को दर्शाती है।

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