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राम मंदिर ट्रस्ट में पारदर्शिता की पहल: नवगठित ऑडिट समिति ने शुरू की दान और खर्च की जांच

अभिषेक सिंह/ अयोध्या: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर निर्माण, दान संग्रह और खर्चों को लेकर पूर्ण पारदर्शिता (Transparency) सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में कुछ हलकों से उठी चिंताओं और सवालों को विराम देने के लिए, ट्रस्ट द्वारा नवगठित ‘ऑडिट समिति’ ने अपना काम विधिवत रूप से शुरू कर दिया है। इस समिति ने अपनी पहली ही बैठक में पिछले तीन वर्षों के दौरान आए दान और विभिन्न मदों में हुए खर्चों के विस्तृत ऑडिट (महालेखा परीक्षण) की प्रक्रिया आरंभ कर दी है।

ऑडिट समिति का गठन और उद्देश्य

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित राम मंदिर ट्रस्ट को देश-विदेश के करोड़ों रामभक्तों ने दिल खोलकर समर्पण निधि (Donation) दी है। इस अपार धनराशि के प्रबंधन को पारदर्शी बनाने के लिए ट्रस्ट ने पूर्व नौकरशाहों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CAs) और वित्तीय विशेषज्ञों को शामिल कर एक स्वतंत्र ऑडिट समिति का गठन किया है। इस समिति का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दान में मिले एक-एक पैसे का हिसाब स्पष्ट हो और उसका उपयोग केवल मंदिर निर्माण और उससे जुड़े विकास कार्यों में ही किया जाए।

किन पहलुओं की हो रही है जांच?

ऑडिट समिति मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर अपनी जांच केंद्रित कर रही है:
* समर्पण निधि अभियान: 2021 में चले विश्व के सबसे बड़े क्राउड-फंडिंग अभियान के दौरान आए चेक, ड्राफ्ट और नकद राशि का मिलान।
* निर्माण कार्य का खर्च: एलएंडटी (L&T) और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (TCE) सहित अन्य एजेंसियों को किए गए भुगतान का मूल्यांकन।
* जमीन खरीद: मंदिर परिसर के विस्तार के लिए खरीदी गई जमीनों के दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की कानूनी और वित्तीय समीक्षा।

भक्तों का विश्वास कायम रखना है लक्ष्य

ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने स्पष्ट किया है कि ट्रस्ट का हर काम शीशे की तरह साफ है। इस ऑडिट का मकसद किसी पर शक करना नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं के उस अटूट विश्वास को कायम रखना है, जो उन्होंने भगवान राम के मंदिर के लिए दिखाया है। ऑडिट रिपोर्ट पूरी होने के बाद इसे सार्वजनिक पटल पर भी रखा जा सकता है, ताकि किसी भी तरह की भ्रामक खबरों पर हमेशा के लिए विराम लग सके।

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