असिस्टेंट प्रोफेसर देबस्मिता पॉल हत्याकांड
दिल्ली महिला आयोग सख्त, दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर मांगी विस्तृत रिपोर्ट

नई दिल्ली (पल्लवी श्रीवास्तव): दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के शिवाजी कॉलेज की होनहार असिस्टेंट प्रोफेसर देबस्मिता पॉल की उनके ही फ्लैट में हुई रहस्यमयी और संदिग्ध मौत का मामला अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस संवेदनशील और खौफनाक घटना का कड़ा संज्ञान लेते हुए दिल्ली महिला आयोग (DCW) ने अपनी संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इस मामले में ‘स्वतः संज्ञान’ (Suo Motu) लिया है। आयोग ने दिल्ली पुलिस को एक सख्त नोटिस जारी करते हुए इस पूरे हत्याकांड पर अब तक की गई कार्रवाई और जांच की एक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। महिला आयोग के इस दखल के बाद पुलिस महकमे में खलबली मच गई है और जांच की रफ्तार तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है।
महिला आयोग ने उठाए तीखे सवाल
दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष ने पुलिस को भेजे नोटिस में साफ किया है कि देश की राजधानी में एक प्रतिष्ठित कॉलेज की महिला प्रोफेसर का उनके ही घर में सुरक्षित न होना बेहद चिंताजनक है। आयोग ने पुलिस से मुख्य रूप से चार बिंदुओं पर जवाब मांगा है:
मामले में दर्ज की गई एफआईआर (FIR) की कॉपी।
1. घटनास्थल से जुटाए गए फोरेंसिक और डिजिटल साक्ष्यों की वर्तमान स्थिति।
2. क्या इस मामले में अभी तक किसी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान या गिरफ्तारी हुई है?
3. मृतका के परिजनों को सुरक्षा और न्याय दिलाने के लिए प्रशासन द्वारा क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
4. आयोग ने पुलिस को इन सभी जानकारियों के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने या अगले 48 घंटों के भीतर लिखित रिपोर्ट सौंपने का अल्टीमेटम दिया है।
हत्या की आशंका और उलझी हुई गुत्थी
गौरतलब है कि देबस्मिता पॉल का शव उनके फ्लैट में बेहद संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था, जिसके बाद से ही पुलिस इसे एक सुनियोजित हत्या (Murder) के एंगल से देख रही है। शुरुआती जांच में फ्लैट के भीतर मिले संघर्ष के निशानों और बिखरे सामान ने इस अंदेशे को और मजबूत किया है। पुलिस की कई टीमें, जिनमें क्राइम ब्रांच और स्पेशल सेल के अधिकारी भी शामिल हैं, लगातार मृतका के मोबाइल फोन के कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (CDR) और अपार्टमेंट के एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स पर लगे सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को खंगाल रही हैं। हालांकि, अभी तक पुलिस किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है, जिससे मृतका के सहयोगियों, छात्रों और परिजनों में भारी आक्रोश है।
वर्किंग विमेन की सुरक्षा पर दोबारा बहस
इस दुखद घटना ने दिल्ली जैसे महानगर में अकेले रहने वाली कामकाजी और उच्च शिक्षित महिलाओं (Working Women) की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर से एक गंभीर बहस को जन्म दे दिया है। दिल्ली महिला आयोग का यह कड़ा रुख इसी बात का प्रतीक है कि इस मामले को ठंडे बस्ते में नहीं जाने दिया जाएगा। विश्वविद्यालय के शिक्षक संगठनों और छात्र संघों ने भी महिला आयोग के इस कदम का स्वागत किया है और मांग की है कि जब तक देबस्मिता पॉल के हत्यारों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता, तब तक उनका यह शांतिपूर्ण आंदोलन और न्याय की मांग जारी रहेगी।



