‘अगर नैतिक साहस है तो भाग लें’: यूपी विधानसभा में महिला आरक्षण पर योगी ने विपक्ष को दी खुली चुनौती

उत्तर प्रदेश की राजनीति में गुरुवार का दिन बेहद गहमागहमी भरा रहा। यूपी विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में महिला आरक्षण और सशक्तिकरण के मुद्दे पर जबरदस्त राजनीतिक सरगर्मी देखने को मिली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर तीखा प्रहार करते हुए उन्हें चुनौती दी कि ‘अगर उनमें नैतिक साहस है, तो वे इस चर्चा में भाग लें।’ रिपोर्ट के अनुसार, सदन में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई और दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे को ‘महिला विरोधी’ करार दिया।
मुख्यमंत्री का प्रस्ताव और 5 घंटे की चर्चा की मांग:
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया, जिसमें महिला सशक्तिकरण के विषय पर सदन में पांच घंटे की विस्तृत चर्चा कराने की मांग की गई। इस प्रस्ताव को पटल पर रखते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से महिला आरक्षण के मार्ग में आने वाली “बाधाओं” (Hurdles) को भी सदन के सामने रखा। सरकार का उद्देश्य यह है कि महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने और समाज में उनकी राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए इन बाधाओं पर खुलकर और सार्थक बात होनी चाहिए।
विपक्ष को ‘नैतिक साहस’ की चुनौती:
सत्र के दौरान जब विपक्ष की ओर से प्रतिक्रियाएं आईं, तो सीएम योगी ने कड़ा रुख अपनाते हुए विपक्ष के इरादों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने सदन में मौजूद विपक्षी नेताओं को सीधे तौर पर ललकारते हुए कहा कि जो लोग वास्तव में महिला सशक्तिकरण के पक्षधर हैं, उन्हें इस महत्वपूर्ण बहस का हिस्सा बनना चाहिए। ‘नैतिक साहस’ का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने यह संदेश देने की कोशिश की कि विपक्ष को केवल राजनीति करने के बजाय महिलाओं के वास्तविक मुद्दों का सामना करना चाहिए।
सदन में तीखी नोकझोंक और ‘महिला विरोधी’ के आरोप:
यह एक दिवसीय विशेष सत्र उस समय और अधिक गरमा गया, जब सत्ता पक्ष (ट्रेजरी बेंच) और विपक्षी सदस्यों के बीच सीधी और तीखी बहस शुरू हो गई। चर्चा के दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर जमकर जुबानी हमले किए।
* सत्ता पक्ष का आरोप: सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर महिला आरक्षण की राह में रोड़े अटकाने और इस गंभीर मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया।
* विपक्ष का पलटवार: विपक्ष ने भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।
इस भारी हंगामे के बीच दोनों ही राजनीतिक धड़ों ने एक-दूसरे पर “महिला विरोधी” (Anti-women) होने का ठप्पा लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य:
विधानसभा में महिला सशक्तिकरण पर लाए गए इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य उन सभी कारणों और चुनौतियों की पहचान करना है, जो महिलाओं की प्रगति में बाधा बन रहे हैं। सरकार यह चाहती है कि इस लंबी चर्चा के माध्यम से पक्ष-विपक्ष की राजनीति से ऊपर उठकर महिलाओं के हित में एक स्पष्ट और ठोस रास्ता तैयार किया जा सके।
उत्तर प्रदेश विधानसभा का यह विशेष सत्र इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आधी आबादी के अधिकार और महिला आरक्षण का मुद्दा अब सूबे की राजनीति के सबसे अहम मुद्दों में से एक बन चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा विपक्ष को दी गई इस खुली चुनौती ने राजनीतिक माहौल को पूरी तरह से गरमा दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विधानसभा में होने वाली इस लंबी बहस से उत्तर प्रदेश की महिलाओं के हित में क्या सकारात्मक नीतियां निकलकर सामने आती हैं और क्या राजनेता आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर कोई ठोस समाधान निकाल पाते हैं या नहीं।



