ऑस्ट्रेलिया में पुलिस का माफीनामा
नव-नाजियों की रैली की पूर्व सूचना न देने पर न्यू साउथ वेल्स पुलिस ने यहूदी समुदाय से मांगी सार्वजनिक माफी
इंडियन व्यू टीम/ सिडनी / कैनबरा: ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में हाल ही में घटी एक घटना ने कानून-व्यवस्था और अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऑस्ट्रेलिया की ‘न्यू साउथ वेल्स पुलिस’ (New South Wales Police – NSW) के एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने सिडनी में आयोजित हुई एक नव-नाजी (Neo-Nazi) रैली की पूर्व सूचना यहूदी समूहों (Jewish groups) को न देने के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। इस चूक के कारण पूरे यहूदी समुदाय में भारी भय, असुरक्षा और आक्रोश का माहौल पैदा हो गया था।
घटना के अनुसार, कुछ दिन पहले सिडनी के मध्य में धुर-दक्षिणपंथी और नव-नाजी विचारधारा (Neo-Nazi ideology) का समर्थन करने वाले चरमपंथियों के एक समूह ने रैली निकाली थी। इस रैली में खुलेआम नस्लभेदी नारे लगाए गए और यहूदी विरोधी (Antisemitic) प्रतीकों का प्रदर्शन किया गया। हैरानी की बात यह रही कि स्थानीय पुलिस को इस प्रदर्शन की खुफिया जानकारी पहले से थी, लेकिन उन्होंने प्रोटोकॉल का पालन करते हुए स्थानीय यहूदी समुदाय के नेताओं और सिनेगॉग (Synagogues) को इस खतरे के बारे में कोई ‘प्री-वार्निंग’ (पूर्व सूचना) नहीं दी।
परिणामस्वरूप, कई यहूदी नागरिक और परिवार अनजाने में इस रैली के रास्ते में आ गए, जिससे उनके बीच दहशत फैल गई। यहूदी समुदाय के नेताओं ने पुलिस की इस घोर लापरवाही की कड़ी निंदा करते हुए इसे “समुदाय की सुरक्षा के साथ खिलवाड़” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की विफलता के कारण समुदाय के सदस्य खुद को लक्षित हमलों (Targeted attacks) के खतरे में महसूस कर रहे थे।
बढ़ते दबाव और आलोचनाओं के बाद, न्यू साउथ वेल्स पुलिस के सहायक आयुक्त (Assistant Commissioner) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर पुलिस की गलती स्वीकार की। उन्होंने कहा, “हम मानते हैं कि खतरे के आकलन और सूचना साझा करने (Information sharing) की हमारी प्रणाली में एक बड़ी चूक हुई है। हम यहूदी समुदाय के डर और गुस्से को समझते हैं और उन्हें समय पर सतर्क न कर पाने के लिए बिना शर्त माफी (Unconditional apology) मांगते हैं”।
पुलिस ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में ऐसी किसी भी चरमपंथी या नफरत फैलाने वाली (Hate speech) रैली के मामले में अल्पसंख्यक समुदायों को ‘रियल-टाइम अलर्ट’ भेजने के लिए एक नई ‘कम्युनिटी थ्रेट वार्निंग’ (Community Threat Warning) प्रणाली लागू की जाएगी। इसके अलावा, नव-नाजियों द्वारा रैली के दौरान किए गए घृणा अपराधों की पहचान करने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स (Task Force) का गठन किया गया है। ऑस्ट्रेलिया में हाल के वर्षों में धुर-दक्षिणपंथी चरमपंथ और यहूदी-विरोधी घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है, जिसे लेकर वहां की सरकार ने कड़े ‘नस्लवाद विरोधी’ (Anti-racism) कानून बनाने की प्रक्रिया भी तेज कर दी है।
