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मेलबर्न में रक्षा निर्माता कंपनी पर हमले की जांच ‘आतंकवाद’ के रूप में

चरमपंथी गुटों पर शिकंजा, इजरायल को हथियार आपूर्ति का था विरोध

अभिषेक सिंह/ मेलबर्न / कैनबरा: ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में एक प्रमुख रक्षा विनिर्माण कंपनी पर हुए हिंसक आगजनी हमले ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। ऑस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस (AFP), विक्टोरियन पुलिस और खुफिया एजेंसी ASIO ने संयुक्त रूप से इस घटना की जांच ‘आतंकवाद’ (Terrorism) के एक कृत्य के रूप में शुरू कर दी है। अधिकारियों का मानना है कि इस हमले के पीछे “वामपंथी चरमपंथियों” (Far-left extremists) और अराजकतावादी (Anarchist) विचारधारा वाले समूहों का हाथ है।

यह घटना 5 जुलाई 2025 को मेलबर्न स्थित ‘लोविट टेक्नोलॉजीज’ (Lovitt Technologies) के परिसर में हुई थी, जहां हथियारों का विरोध करने वाले प्रदर्शनकारियों ने जमकर तोड़फोड़ की थी और कंपनी व आसपास के कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया था। पुलिस के अनुसार, इस गंभीर अपराध में शामिल दोषियों को आजीवन कारावास (Life imprisonment) तक की सजा हो सकती है।

घटना के बाद एक नकाबपोश व्यक्ति द्वारा ऑनलाइन जारी किए गए एक वीडियो ने इस मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है। वीडियो में इस व्यक्ति ने एक “अनाम सेल” (Anonymous cell) का प्रतिनिधित्व करने का दावा करते हुए फिलिस्तीन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। उसने दावा किया कि ‘लोविट टेक्नोलॉजीज’ को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि यह कंपनी वैश्विक ‘F-35 जॉइंट स्ट्राइक फाइटर प्रोग्राम’ (F-35 Joint Strike Fighter program) के लिए महत्वपूर्ण कलपुर्जे बनाती है, और इन लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल इजरायली सेना द्वारा किया जा रहा है।

इस वीडियो में धमकी भरे लहजे में कहा गया है, “यह कोई दुर्घटना या विचारहीन बर्बरता नहीं थी। यदि आप किसी भी प्रकार के हथियारों के घटकों का निर्माण जारी रखते हैं तो इसके गंभीर परिणाम होंगे… इजरायल को हथियार देना बंद करें अन्यथा…”। इस धमकी ने पूरे ऑस्ट्रेलिया के रक्षा और औद्योगिक क्षेत्र में भारी दहशत फैला दी है।

ऑस्ट्रेलियाई खुफिया एजेंसियों का कहना है कि यह हमला अंतरराष्ट्रीय संघर्षों (International Conflicts) का घरेलू सुरक्षा पर पड़ने वाले सीधे प्रभाव का एक खतरनाक उदाहरण है। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल फुटप्रिंट्स और खुफिया नेटवर्क के जरिए इस चरमपंथी सेल के सदस्यों की पहचान करने में जुटी है। सरकार ने रक्षा प्रतिष्ठानों और हथियारों का निर्माण करने वाली सभी कंपनियों की सुरक्षा व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से बढ़ाने के निर्देश जारी किए हैं। इस घटना ने एक बार फिर हथियार आपूर्ति और भू-राजनीतिक तनावों के कारण पैदा हो रहे घरेलू चरमपंथ (Domestic Extremism) पर एक गंभीर राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है।

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