पश्चिम एशिया में गहराया युद्ध का संकट: अमेरिकी और सऊदी सेना ने इराक में ईरान-समर्थित उग्रवादियों के ठिकानों पर किया बड़ा हमला

राघवेंद्र प्रताप सिंह
वाशिंगटन / बगदाद

पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी सैन्य संघर्ष एक नए और अधिक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना के मध्य कमान (CENTCOM) ने एक बड़ा दावा करते हुए पुष्टि की है कि अमेरिकी और सऊदी अरब की संयुक्त सेनाओं ने इराक के भीतर सक्रिय ईरान-समर्थित सशस्त्र उग्रवादी समूहों के कई संदिग्ध सैन्य ठिकानों पर सटीक हवाई हमले (Precision Airstrikes) किए हैं। इन हमलों के बाद पूरे क्षेत्र में रणनीतिक तनाव अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गया है।

अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार, यह संयुक्त कार्रवाई उन ठिकानों पर की गई है जिनका उपयोग ईरान-समर्थित मिलिशिया समूह रेड सी, खाड़ी क्षेत्र और अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर रॉकेट व ड्रोन हमलों की योजना बनाने के लिए कर रहे थे। इस हमले के बाद इराकी राजनीति में भारी भूचाल आ गया है। इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने इसे देश की संप्रभुता का सीधा उल्लंघन करार देते हुए अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों को आपातकालीन स्थिति से निपटने के निर्देश दिए हैं।

अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को बेहद संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि इसमें सऊदी अरब की प्रत्यक्ष भागीदारी ने मध्य पूर्व के समीकरणों को और जटिल बना दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए ‘उचित समय पर कड़ा जवाब’ देने की धमकी दी है। संयुक्त राष्ट्र ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है, ताकि यह क्षेत्रीय संघर्ष एक व्यापक तीसरे विश्व युद्ध का रूप न ले ले।

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