अफगानिस्तान में सीमा पार हिंसा पर संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट, पाकिस्तान पर गंभीर आरोप

नई दिल्ली ( इंडियन व्यू टीम) : अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यू.एन.ए.एम.ए.) ने आज बताया कि पहली अप्रैल से 30 जून के बीच सीमा पार हिंसा में 57 लोग मारे गए हैं और 342 घायल हुए हैं। इन सभी के लिए पाकिस्तान के सुरक्षा बल जिम्मेदार हैं।
यू.एन.ए.एम.ए. ने कहा कि 28 जून को पक्तिया, पक्तिका और कुनार प्रांतों में पाकिस्तान के सैन्य बलों द्वारा घातक हवाई हमले किए थे। इसके बाद अप्रैल में कुनार में भी गोलाबारी हुई।
यह जानकारी पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच सामने आई है। इस महीने की शुरुआत में, अमरीका स्थित मानवाधिकार संगठन ने अफगानिस्तान में पाकिस्तान के हालिया हमलों के बाद संभावित युद्ध अपराधों की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
अफगानिस्तान में सीमा पार हिंसा, विशेष रूप से पाकिस्तान और ईरान के साथ लगी सीमाओं पर, मुख्य रूप से भू-राजनीतिक, वैचारिक और सुरक्षा कारणों से हो रही है। इन हिंसक झड़पों और तनाव के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) : पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव का सबसे बड़ा कारण TTP (पाकिस्तानी तालिबान) है। पाकिस्तान का आरोप है कि TTP के आतंकवादी अफगान क्षेत्र से संचालित होते हैं और पाकिस्तान में घातक हमले करते हैं। वहीं, काबुल में बैठी तालिबान सरकार इन आरोपों का खंडन करती है।
डूरंड रेखा का विवाद: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच 2,600 किलोमीटर से अधिक लंबी सीमा है जिसे डूरंड रेखा कहा जाता है। अफगानिस्तान की सरकारें ऐतिहासिक रूप से इस सीमा को मान्यता नहीं देती हैं, क्योंकि यह ब्रिटिश काल में खींची गई थी और यह पश्तूनों की आबादी को दो हिस्सों में बांटती है। सीमा बाड़ लगाने को लेकर अक्सर दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़पें होती हैं।
जवाबी सैन्य कार्रवाई: पाकिस्तान अक्सर अफगान सीमावर्ती इलाकों में हवाई हमले करता है, जिसका उद्देश्य TTP के ठिकानों को नष्ट करना होता है। जवाबी कार्रवाई में, अफगान तालिबान बल पाकिस्तानी सैन्य चौकियों या ड्रोन पर हमला करते हैं, जिससे हिंसा का चक्र और बढ़ जाता है।
ईरान के साथ तनाव (शरणार्थी और ड्रग्स): अफगानिस्तान की पश्चिमी सीमा ईरान से लगती है। वहां तनाव का मुख्य कारण बड़ी संख्या में अफगान शरणार्थियों का ईरान में प्रवेश, अवैध नशीली दवाओं की तस्करी (ड्रग्स) और इस्लामिक स्टेट (IS) जैसे आतंकवादी समूहों की मौजूदगी है। सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ईरान द्वारा सीमा पर दीवार बनाने से भी तनाव पैदा हुआ है।
वैचारिक मतभेद: कुछ पड़ोसी देशों (जैसे ईरान) और अफगानिस्तान के बीच शासन की प्रकृति और विचारधारा में अंतर भी अविश्वास पैदा करता है, जो सीमावर्ती क्षेत्रों में झड़पों के रूप में सामने आता है। इन कारणों से सीमावर्ती इलाकों में लगातार अस्थिरता बनी हुई है और दोनों पक्षों के बीच शांति स्थापित करने के कई प्रयास अब तक विफल रहे हैं।



