पेपर लीक मामलों पर रोकथाम के लिए लोक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026 पर लोकसभा में आज फिर होगी चर्चा

नई दिल्ली (राघवेंद्र प्रताप सिंह) : लोकसभा में आज लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर फिर से चर्चा शुरू होगी। कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कल सदन में विधेयक को विचार और पारित कराने के लिए पेश किया था। यह विधेयक लोक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम के अधिनियम, 2024 में संशोधन के लिए लाया गया है।

विधेयक में कई महत्वपूर्ण प्रावधान हैं, जिनमें दस वर्ष तक की कैद, दस करोड़ रुपये तक का जुर्माना और अपराधियों की संपत्ति की ज़ब्त करने जैसे कठोर दंड शामिल हैं। पेपर लीके से जुडे मामलों का शीघ्र निपटारा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विधेयक में प्रत्येक राज्य सरकार और केंद्र शासित प्रदेश में दैनिक सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का प्रावधान है।

विधेयक के प्रावधान के अनुसार, अपराधों की जांच पुलिस थाने में सूचना दर्ज होने की तिथि से दो महीने के भीतर पूरी की जानी चाहिए। वहीं, अभियोग पत्र दाखिल होने की तिथि से तीन महीने के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी कर ली जानी चाहिए।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि यह नया कानून देश के छात्रों और युवाओं के कल्याण की रक्षा के लिए सरकार की गहरी प्रतिबद्धता का परिचायक है। उन्होंने यह भी कहा कि साथ ही, यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस संकल्प को भी दोहराता है कि देश के युवाओं के भविष्य से कोई समझौता नहीं होने दिया जाएगा।

कांग्रेस और यूपीए के शासनकाल में हुई कई पेपर लीक की घटनाओं का उल्लेख करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इन मामलों के निपटारे के लिए कोई व्यापक कानून नहीं था। मोदी सरकार त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 लेकर आई।

चर्चा में भाग लेते हुए, कांग्रेस के गौरव गगोई ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा क्षेत्र के प्रति गंभीर नहीं है और वास्तविक सुधार लाने का इरादा नहीं रखती है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह नया विधेयक केवल दिखावा है, क्योंकि इसमें केवल पूर्व के कानून में संशोधन किया जा रहा है।

वहीं, भाजपा सांसद बंसुरी स्वराज ने इस विधेयक को क्रांतिकारी कदम बताया। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसा विधेयक समय की मांग है। सुश्री स्वराज ने कहा कि आज संगठित परीक्षा माफिया अंतरराज्यीय आपराधिक नेटवर्क में बदल गया है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक में प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को तेज़ सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक न्यायालय स्थापित करने का अधिकार दिया गया है।

चर्चा के दौरान, समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने विभिन्न परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने पर चिंता व्यक्त की। श्री यादव ने कहा कि लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 2024 लागू होने के बावजूद इस वर्ष NEET UG का प्रश्नपत्र लीक हो गया।

AITC के अभिषेक बनर्जी, तेलुगु देशम पार्टी के लावु श्री कृष्ण देवरायलु और शिवसेना के डॉ. श्रीकांत शिंदे ने विधेयक का समर्थन किया। तेलुगु देशम के सांसद ने प्रश्नपत्र तैयार करने वाली समितियों के विकेंद्रीकरण की भी मांग की।

वहीं, DMK के दयानिधि मारन ने इस बात पर बल दिया कि मुख्य मुद्दा राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा NEET ही है, जो एकसमान नहीं है और छात्रों के हितों के विरुद्ध है।

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सरकार पर छात्रों के हितों की रक्षा करने में विफल रहने और शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि युवा शिक्षा व्यवस्था में अपना विश्वास बहाल करने और जवाबदेही की मांग करने के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने नव नियुक्त शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी पर भी आरोप लगाए, जिसके कारण लोकसभा में तीखी बहस हुई। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी और किरेन रिजिजू ने उनसे अपने बयानों की प्रामाणिकता साबित करने या सदन से माफी मांगने को कहा।

चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने कहा कि छात्र ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जो उनके भविष्य की रक्षा करे, न कि राजनीति। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष परीक्षा करोड़ों परिवारों के लिए अवसरों का एकमात्र द्वार है।

एनसीपी (एसपी) सांसद सुप्रिया सुले, समाजवादी पार्टी की डिंपल यादव, भाजपा के अनुराग ठाकुर और शशांक मणि, कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल, सीपीआई (एम) के एस वेंकटेशन, वाईएसआरसीपी के गुरुमूर्ति मद्दीला, आरजेडी के अभय कुमार सिन्हा, एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी और एसएडी की हरसिमरत कौर बादल सहित अन्य सदस्यों ने भी चर्चा में भाग लिया।

विधेयक पर अभी चर्चा पूरी नहीं हुई। पीठासीन अधिकारी संध्या राय ने सदन को आज सुबह 11 बजे फिर से शुरू होने तक के लिए स्थगित कर दिया।

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