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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एंडी बर्नहैम (Andy Burnham) को ब्रिटेन का नया प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी, दोनों देशों के बीच साझा लोकतांत्रिक मूल्यों का किया जिक्र

अभिषेक सिंह/ नई दिल्ली: भारत और ब्रिटेन के कूटनीतिक और ऐतिहासिक संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लेबर पार्टी के नेता एंडी बर्नहैम को ब्रिटेन का नया प्रधानमंत्री नियुक्त होने पर हार्दिक बधाई दी है। बर्नहैम ने ब्रिटेन में हुए हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और कीर स्टार्मर के इस्तीफे के बाद 10 डाउनिंग स्ट्रीट (10 Downing Street) की कमान संभाली है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आधिकारिक संदेश में दोनों देशों के बीच मजबूत लोकतांत्रिक परंपराओं और रणनीतिक साझेदारी को और अधिक गहरा करने की उम्मीद जताई है।

साझा मूल्यों और भविष्य की साझेदारी पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने एक्स (X) हैंडल पर लिखा, “यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने पर एंडी बर्नहैम को मेरी हार्दिक बधाई। भारत और ब्रिटेन के संबंध सदियों पुराने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन और मजबूत जन-संपर्क (People-to-People Contact) पर आधारित हैं। मैं द्विपक्षीय व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए आपके साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूं।”

मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर टिकी निगाहें

एंडी बर्नहैम के सत्ता में आने के बाद भारत और ब्रिटेन के बीच लंबे समय से लंबित पड़े ‘मुक्त व्यापार समझौते’ (FTA) पर भी जल्द मुहर लगने की उम्मीदें तेज हो गई हैं। पिछले कुछ वर्षों से दोनों देशों के बीच बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR), ऑटोमोबाइल पर टैरिफ और भारतीय पेशेवरों के लिए वीजा नियमों को लेकर बातचीत चल रही है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि लेबर पार्टी का नेतृत्व भारत के साथ व्यापारिक संबंधों को तेजी से आगे बढ़ाने के पक्ष में है।

वैश्विक चुनौतियों पर एक साथ काम करने का संकल्प

अपने बधाई संदेश के माध्यम से भारत सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change), आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर भारत ब्रिटेन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करना जारी रखेगा। ब्रिटेन में एक बड़ी भारतीय डायस्पोरा (प्रवासी आबादी) निवास करती है, जो दोनों देशों के बीच एक मजबूत सांस्कृतिक और आर्थिक सेतु का काम करती है। बर्नहैम के नेतृत्व में यह संबंध और अधिक प्रगाढ़ होने की संभावना है।

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