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विंबलडन का दिल है सेंटर कोर्ट, जानिए इसकी सबसे बड़ी खासियतें

टेनिस की दुनिया में विंबलडन सबसे पुराना और सबसे प्रतिष्ठित ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट माना जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 1877 में हुई थी। घास पर खेले जाने वाले इस ऐतिहासिक टूर्नामेंट में सेंटर कोर्ट का विशेष महत्व है। इसे विंबलडन का ‘दिल’ कहा जाता है, क्योंकि इसी कोर्ट ने खेल इतिहास के कई यादगार और ऐतिहासिक मुकाबलों को अपनी आंखों के सामने देखा है।

जब विंबलडन की शुरुआत हुई थी, तब टूर्नामेंट के लिए कोर्ट पर ग्रिड पैटर्न बनाया गया था। बाद में वर्ष 1881 में दो अलग-अलग कोर्टों को मिलाकर एक मुख्य कोर्ट तैयार किया गया, जो परिसर के बिल्कुल मध्य में स्थित था। इसी वजह से इसका नाम सेंटर कोर्ट पड़ गया।

मौजूदा सेंटर कोर्ट की शुरुआत वर्ष 1922 में हुई, जब विंबलडन चैंपियनशिप को नए परिसर ऑल इंग्लैंड लॉन टेनिस एंड क्रोके क्लब में स्थानांतरित किया गया। दिलचस्प बात यह है कि इस कोर्ट का उपयोग पूरे साल में केवल दो सप्ताह के लिए, यानी विंबलडन चैंपियनशिप के दौरान ही किया जाता है। हालांकि, इन दो हफ्तों के लिए पूरे वर्ष इसकी बेहद सावधानी से देखभाल की जाती है।

साभार : गूगल

सेंटर कोर्ट की सबसे बड़ी खासियत इसकी घास है। इसकी गुणवत्ता को सर्वोच्च बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। यहां केवल बारहमासी राई घास का इस्तेमाल किया जाता है और इसकी लंबाई आमतौर पर 8 मिलीमीटर रखी जाती है, ताकि खिलाड़ियों को सर्वश्रेष्ठ खेल परिस्थितियां मिल सकें।

सेंटर कोर्ट में मौजूद रॉयल बॉक्स भी इसकी खास पहचान है। इस विशेष बॉक्स में ब्रिटिश शाही परिवार के सदस्यों के साथ-साथ अन्य विशिष्ट अतिथियों को मैच देखने के लिए आमंत्रित किया जाता है। यह परंपरा विंबलडन की शाही विरासत का अहम हिस्सा मानी जाती है।

बारिश के कारण मैच प्रभावित न हों, इसके लिए वर्ष 2009 में सेंटर कोर्ट पर अत्याधुनिक रिट्रेक्टेबल (पुल-इन) छत लगाई गई। इसकी मदद से बारिश शुरू होने पर लगभग 10 मिनट के भीतर छत को बंद कर खेल दोबारा शुरू किया जा सकता है।

विंबलडन के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित मुकाबले, जिनमें पुरुष और महिला एकल के फाइनल भी शामिल हैं, इसी सेंटर कोर्ट पर खेले जाते हैं। यहां खेलने वाले खिलाड़ियों के लिए पूरी तरह सफेद पोशाक पहनना अनिवार्य होता है। इसके अलावा कोर्ट के चारों ओर किसी भी प्रकार के व्यावसायिक विज्ञापन बोर्ड लगाने की अनुमति नहीं है, ताकि इसकी पारंपरिक और शाही पहचान बरकरार रहे।

सेंटर कोर्ट ने टेनिस इतिहास के कई यादगार मुकाबलों की मेजबानी की है। महान खिलाड़ी रोजर फेडरर ने अपने आठों विंबलडन खिताब इसी कोर्ट पर जीते। वर्ष 2008 में फेडरर और राफेल नडाल के बीच खेला गया ऐतिहासिक फाइनल भी इसी कोर्ट पर हुआ था, जिसे टेनिस इतिहास के सबसे महान मुकाबलों में गिना जाता है।

इसके अलावा वर्ष 2019 में नोवाक जोकोविच और फेडरर के बीच खेला गया विंबलडन इतिहास का सबसे लंबा पुरुष एकल फाइनल भी सेंटर कोर्ट का ही हिस्सा बना। यह मुकाबला आज भी प्रशंसकों की यादों में ताजा है। सेंटर कोर्ट केवल एक टेनिस कोर्ट नहीं, बल्कि खेल इतिहास की अमूल्य धरोहर है। यहां जीत दर्ज करना किसी भी खिलाड़ी के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जाता है।

यही वजह है कि जब भी विंबलडन का नाम लिया जाता है, सबसे पहले सेंटर कोर्ट की चर्चा होती है। परंपरा, सम्मान और ऐतिहासिक मुकाबलों का यह मंच आज भी अपनी अनूठी पहचान और गौरवशाली विरासत को कायम रखे हुए है।

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