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केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत: मेडिकल ग्राउंड पर मिली 7 दिन की अंतरिम जमानत, दिल्ली की सियासत में फिर लौटी गरमाहट

पल्लवी श्रीवास्तव/ नई दिल्ली | दिल्ली की राजनीति और आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए आज का दिन एक बड़ी संजीवनी लेकर आया है। सुप्रीम कोर्ट की अवकाशकालीन पीठ (Vacation Bench) ने एक अहम फैसला सुनाते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ‘मेडिकल ग्राउंड’ (स्वास्थ्य कारणों) पर 7 दिन की अंतरिम जमानत (Interim Bail) दे दी है। कल की लंबी और तीखी बहस के बाद आज सुबह 10:30 बजे जस्टिस की पीठ ने यह आदेश पारित किया।

इस फैसले से केजरीवाल को कुछ दिनों के लिए ही सही, लेकिन तिहाड़ जेल से बाहर आने का मौका मिल गया है, जिससे उनके स्वास्थ्य की उचित जांच हो सकेगी और पार्टी को एक जरूरी राजनीतिक ऊर्जा मिलेगी।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु और शर्तें

  1. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यह जमानत केवल स्वास्थ्य जांच और इलाज के लिए दी गई है। इसके साथ ही कोर्ट ने कुछ बेहद सख्त शर्तें (Strict Conditions) भी लागू की हैं:
  2. जमानत की अवधि और सरेंडर: यह अंतरिम जमानत केवल सात (7) दिनों के लिए है। केजरीवाल को 2 जुलाई की शाम 5 बजे तक वापस तिहाड़ जेल में सरेंडर करना होगा।
  3. सचिवालय जाने पर रोक: पिछली अंतरिम जमानत की तरह ही, इस बार भी मुख्यमंत्री को दिल्ली सचिवालय (Secretariat) जाने या किसी भी आधिकारिक फाइल पर हस्ताक्षर करने की अनुमति नहीं होगी, जब तक कि उपराज्यपाल (LG) की मंजूरी आवश्यक न हो।
  4. सार्वजनिक रैलियों पर प्रतिबंध: चूंकि यह जमानत केवल ‘मेडिकल ग्राउंड’ पर दी गई है, इसलिए कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केजरीवाल इस दौरान किसी भी राजनीतिक रैली, रोड शो या बड़ी सार्वजनिक जनसभा को संबोधित नहीं करेंगे।
  5. मेडिकल रिपोर्ट सौंपना अनिवार्य: जमानत अवधि समाप्त होने से पहले, केजरीवाल को अपनी सभी डायग्नोस्टिक और मेडिकल टेस्ट्स की विस्तृत रिपोर्ट (AIIMS या किसी मान्यता प्राप्त विशेषज्ञ से) सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करनी होगी।

कोर्ट में कल क्या हुआ था? (पृष्ठभूमि)
कल (24 जून) हुई सुनवाई के दौरान केजरीवाल के वकीलों ने उनका वजन तेजी से गिरने और यूरिन में कीटोन्स (Ketones) का स्तर बढ़ने का हवाला देते हुए तुरंत विशेषज्ञ जांच की मांग की थी। बचाव पक्ष का तर्क था कि तिहाड़ जेल में आवश्यक कार्डियोलॉजिकल और गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिकल स्कैन की सुविधाएं नहीं हैं।

हालांकि, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा था कि यह रिहाई का सिर्फ एक ‘पैंतरा’ है और जेल प्रशासन उनकी सेहत का पूरा ख्याल रख रहा है। लेकिन आज सुप्रीम कोर्ट ने ‘स्वास्थ्य के मौलिक अधिकार’ (Right to Health) को तरजीह देते हुए मुख्यमंत्री को यह अस्थायी राहत प्रदान कर दी।

आप (AAP) में जश्न, विपक्ष (BJP) का तंज
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद आम आदमी पार्टी के दफ्तर में राहत और खुशी की लहर है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं—संजय सिंह, आतिशी और सौरभ भारद्वाज—ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे ‘सत्य और न्याय की जीत’ बताया है। पार्टी का कहना है कि यह साबित करता है कि मुख्यमंत्री की सेहत को लेकर वे जो चिंता जता रहे थे, वह पूरी तरह जायज थी।

वहीं, मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस पर तंज कसा है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने बयान जारी कर कहा, “अंतरिम जमानत कोई ‘क्लीन चिट’ (Clean Chit) नहीं है। यह सिर्फ जांच के लिए दी गई मोहलत है। शराब घोटाले के मुख्य आरोपी को 7 दिन बाद फिर से जेल की उसी कोठरी में जाना होगा।”

आगे क्या?
सात दिन की यह रिहाई आम आदमी पार्टी के लिए सिर्फ एक मेडिकल ब्रेक नहीं, बल्कि एक ‘स्ट्रैटेजिक टाइम-आउट’ (Strategic Time-out) भी है। यद्यपि केजरीवाल सार्वजनिक रैलियां नहीं कर सकते, लेकिन वे इन 7 दिनों में अपने आवास पर पार्टी के शीर्ष नेताओं और विधायकों के साथ बैठकें कर सकते हैं।

हाल ही में जल संकट, प्रशासनिक फेरबदल और आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर पार्टी जो रणनीतिक दबाव महसूस कर रही है, केजरीवाल की प्रत्यक्ष मौजूदगी उस दबाव को काफी हद तक कम करेगी। हालांकि, पार्टी की असली परीक्षा 2 जुलाई के बाद शुरू होगी, जब उन्हें नियमित जमानत (Regular Bail) के लिए सुप्रीम कोर्ट के सामने यह साबित करना होगा कि उनके खिलाफ ईडी के पास पर्याप्त सबूत नहीं हैं। फिलहाल, इन सात दिनों के लिए दिल्ली का राजनीतिक केंद्र एक बार फिर तिहाड़ से शिफ्ट होकर सिविल लाइंस स्थित मुख्यमंत्री आवास पर आ गया है।

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