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तिहाड़ से बाहर आए अरविंद केजरीवाल: मेडिकल ग्राउंड पर मिली 7 दिन की अंतरिम जमानत, रिहाई के बाद सीधे पहुंचे मेदांता अस्पताल

पल्लवी श्रीवास्तव/ नई दिल्ली | दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल शुक्रवार सुबह तिहाड़ जेल से रिहा हो गए। सुप्रीम कोर्ट की वेकेशन बेंच द्वारा ‘मेडिकल ग्राउंड’ (स्वास्थ्य कारणों) पर 7 दिन की अंतरिम जमानत दिए जाने के बाद आज सुबह उनकी रिहाई की कागजी प्रक्रिया पूरी की गई। जेल से बाहर आते ही मुख्यमंत्री अपने घर जाने के बजाय सीधे गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल (Medanta Hospital) के लिए रवाना हो गए, जहां उनके कई महत्वपूर्ण मेडिकल टेस्ट होने हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कल (25 जून) लंबी सुनवाई के बाद उनके गिरते स्वास्थ्य को संज्ञान में लेते हुए यह अहम फैसला सुनाया था।

तिहाड़ के बाहर भारी सुरक्षा, समर्थकों ने किया स्वागत

आज सुबह से ही तिहाड़ जेल के गेट नंबर 4 के बाहर आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं, विधायकों और वरिष्ठ नेताओं का जमावड़ा शुरू हो गया था। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स के जवानों को भारी संख्या में तैनात किया गया था।

सुबह करीब 10:30 बजे अरविंद केजरीवाल का काफिला कड़ी सुरक्षा के बीच जेल परिसर से बाहर निकला। पार्टी नेताओं—संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज और आतिशी—ने उनका स्वागत किया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट द्वारा रैलियों और सार्वजनिक संबोधनों पर लगाई गई सख्त रोक का पालन करते हुए मुख्यमंत्री ने मीडिया या समर्थकों से कोई बात नहीं की और सीधे अस्पताल का रुख किया।

मेदांता अस्पताल में जांच का दौर शुरू

बीते कुछ हफ्तों से मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य को लेकर AAP लगातार गंभीर चिंता जता रही थी। जेल में उनके तेजी से गिरते वजन, शुगर लेवल के अनियंत्रित होने और यूरिन में कीटोन्स (Ketones) का स्तर बढ़ने की शिकायतें सामने आई थीं।

सूत्रों के मुताबिक, मेदांता अस्पताल में विशेषज्ञों की एक विशेष टीम (Medical Board) का गठन किया गया है। आज दिन भर में उनके कई अहम टेस्ट होंगे, जिनमें कार्डियोलॉजिकल जांच, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिकल स्कैन और फुल-बॉडी पीईटी-सीटी (PET-CT) स्कैन शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, इन सभी जांचों की विस्तृत और प्रमाणित मेडिकल रिपोर्ट 2 जुलाई को सरेंडर करने से पहले कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करनी होगी।

सिर्फ 7 दिन की मोहलत और सख्त शर्तें

ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट ने यह जमानत पूरी तरह से स्वास्थ्य कारणों (Right to Health) को तरजीह देते हुए दी है। यह रिहाई केवल 2 जुलाई की शाम 5 बजे तक के लिए ही वैध है। इस दौरान केजरीवाल को कई सख्त शर्तों का पालन करना होगा:

* वे दिल्ली सचिवालय (Secretariat) नहीं जा सकेंगे।
* एलजी (LG) की पूर्व मंजूरी के बिना किसी भी आधिकारिक फाइल पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे।
* वे किसी भी राजनीतिक जनसभा, रैली या रोड-शो का हिस्सा नहीं बन सकते।

राजनीतिक और रणनीतिक विश्लेषण

  • > आप (AAP) के लिए संजीवनी या सिर्फ ‘मेडिकल ब्रेक’?
  • > राजनीतिक चश्मे से देखा जाए तो अरविंद केजरीवाल की यह 7 दिन की रिहाई आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़े ‘मनोवैज्ञानिक बूस्टर’ (Psychological Booster) का काम करेगी। भले ही सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सार्वजनिक गतिविधियों पर पाबंदी लगा रखी है, लेकिन मेदांता से जांच के बाद जब वे मुख्यमंत्री आवास (सिविल लाइंस) पहुंचेंगे, तो बंद कमरों में पार्टी की अहम रणनीतिक बैठकें जरूर होंगी।
  • > इन दिनों दिल्ली भारी जल संकट और प्रशासनिक टकराव के दौर से गुजर रही है। साथ ही, आगामी दिल्ली विधानसभा चुनावों की रणनीति भी ठंडे बस्ते में है। ऐसे समय में पार्टी के शीर्ष नेताओं को सीधे अपने सुप्रीमो से संवाद करने और दिशा-निर्देश लेने का जो मौका इन 7 दिनों में मिलेगा, वह पूरी पार्टी को एकजुट करने में अहम होगा।
  • > हालांकि, असली चुनौती 2 जुलाई के बाद शुरू होगी। पार्टी की पूरी कानूनी टीम अब इस कोशिश में जुट गई है कि मेदांता की इस मेडिकल रिपोर्ट को आधार बनाकर सुप्रीम कोर्ट से ‘नियमित जमानत’ (Regular Bail) हासिल की जाए, ताकि मुख्यमंत्री को 7 दिन बाद वापस तिहाड़ की सलाखों के पीछे न जाना पड़े।

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