सलाखों के पीछे से सपनों की उड़ान
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के ऐतिहासिक आदेश पर विचाराधीन कैदी ने कड़ी पुलिस सुरक्षा में दिया NEET का पेपर

पल्लवी श्रीवास्तव/रायपुर: शिक्षा एक ऐसा मौलिक अधिकार है जिसे लोहे की मोटी सलाखें भी कैद नहीं कर सकतीं। इस कथन को आज छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में जमीनी हकीकत बनते देखा गया। कड़ी पुलिस सुरक्षा, हथियारों से लैस जवानों का सख्त पहरा और सायरन बजाती पुलिस वैन—यह नजारा किसी कुख्यात अपराधी की अदालत में पेशी का नहीं, बल्कि एक विचाराधीन (Undertrial) कैदी को देश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट-यूजी’ (NEET-UG 2026) दिलाने का था। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के एक बेहद ऐतिहासिक और मानवीय आदेश के अनुपालन में, आज जेल में बंद एक छात्र ने अपने डॉक्टर बनने के सपने को जिंदा रखते हुए निर्धारित परीक्षा केंद्र पर परीक्षा दी।
न्यायपालिका का मानवीय चेहरा: ‘सुधारात्मक न्याय’ की नजीर
यह पूरा घटनाक्रम केवल एक प्रवेश परीक्षा का हिस्सा नहीं है, बल्कि भारतीय कानून व्यवस्था में ‘सुधारात्मक न्याय’ (Reformative Justice) की एक बहुत बड़ी और सकारात्मक नजीर है। विचाराधीन कैदी के रूप में जेल की सजा काट रहे इस युवा ने अपने वकीलों के जरिए हाई कोर्ट में याचिका दायर कर गुहार लगाई थी कि वह लंबे समय से नीट परीक्षा की तैयारी कर रहा है और जेल में भी उसने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी है।
अदालत ने मामले की संवेदनशीलता और शिक्षा के अधिकार (Right to Education) को सर्वोच्च मानते हुए यह स्पष्ट किया कि जब तक कोई व्यक्ति अंतिम रूप से न्यायालय द्वारा दोषी करार नहीं दिया जाता, उसके भविष्य निर्माण के अवसरों को नहीं छीना जा सकता। अदालत का यह फैसला इस बात की तस्दीक करता है कि न्यायपालिका का मुख्य उद्देश्य समाज में सिर्फ दंड देना नहीं, बल्कि भटके हुए युवाओं को सुधार का मार्ग दिखाना भी है।
कड़ी सुरक्षा और NTA की विशेष व्यवस्था
हाई कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद जेल और पुलिस प्रशासन ने इस छात्र को परीक्षा दिलाने के लिए एक अभूतपूर्व और चाक-चौबंद सुरक्षा चक्र तैयार किया था। आज सुबह 8 बजे ही पुलिस एस्कॉर्ट की दो गाड़ियों के बीच छात्र को लेकर पुलिस की वैन रायपुर के निर्धारित परीक्षा केंद्र पर पहुंच गई थी।
इस संवेदनशील मामले को देखते हुए प्रशासन और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने निम्नलिखित विशेष व्यवस्थाएं की थीं:
आइसोलेटेड सीटिंग (अलग कक्ष): केंद्र पर आम परीक्षार्थियों की भारी भीड़ से अलग, इस छात्र के लिए NTA के दिशानिर्देशों के तहत एक विशेष और अलग कमरे की व्यवस्था की गई थी, ताकि अन्य छात्रों में कोई असहजता न हो।
हथियारबंद पहरा: परीक्षा कक्ष के बाहर और केंद्र के मुख्य द्वार पर स्थानीय पुलिस के जवान मुस्तैद रहे। परीक्षा कक्ष के अंदर भी एक सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी और एक विशेष इनविजिलेटर (पर्यवेक्षक) मौजूद रहा, जिससे सुरक्षा में कोई सेंध न लगे।
नो-कांटेक्ट प्रोटोकॉल: पूरी प्रक्रिया के दौरान छात्र को किसी भी बाहरी व्यक्ति, मीडियाकर्मियों या अन्य परीक्षार्थियों से बात करने या संपर्क करने की सख्त मनाही थी।
पेपर लीक के साये के बीच शांतिपूर्ण परीक्षा
गौरतलब है कि हाल ही में नीट परीक्षा को लेकर उठे पेपर लीक, सॉल्वर गैंग और डमी कैंडिडेट्स (प्रॉक्सी) के भारी विवादों के बाद ही आज यह दोबारा परीक्षा (Re-test) आयोजित की गई है। इस बेहद तनावपूर्ण और जांच के दायरे में चल रहे माहौल के बीच एक कैदी को परीक्षा केंद्र तक लाना प्रशासन के लिए किसी दोहरी चुनौती से कम नहीं था।
हालांकि, NTA के पर्यवेक्षकों और रायपुर पुलिस के सटीक समन्वय के चलते छात्र ने बिना किसी बाधा के अपना पेपर पूरा किया। परीक्षा खत्म होते ही उसे तुरंत वैन में बैठाकर वापस सेंट्रल जेल भेज दिया गया।
समाज के लिए एक सशक्त संदेश
रायपुर के इस परीक्षा केंद्र पर आज जो कुछ भी घटा, वह भारतीय न्याय और प्रशासनिक व्यवस्था के इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। एक ऐसे समय में जब देश के युवाओं में परीक्षा प्रणाली को लेकर निराशा पनप रही है, तब एक कैदी के हाथों में हथकड़ी की जगह पेन और ओएमआर (OMR) शीट सौंपना एक बेहद मजबूत संदेश देता है। यह साबित करता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत हों, अगर किसी में सुधार और शिक्षा की सच्ची ललक है, तो कानून और संविधान उसके लिए रास्ते जरूर खोल देता है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी होंगी कि यह जुझारू छात्र इस कठिन परीक्षा में क्या परिणाम हासिल करता है।



