रेलवे के आधुनिकीकरण में नई क्रांति
50 नई 'वंदे भारत स्लीपर' ट्रेनों के संचालन का प्रस्ताव कैबिनेट को भेजा गया

नई दिल्ली (इंफ्रास्ट्रक्चर एवं ट्रांसपोर्ट डेस्क): भारतीय रेलवे को विश्वस्तरीय बनाने और लंबी दूरी की यात्राओं को बेहद आरामदायक व सुगम बनाने की दिशा में रेल मंत्रालय ने एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेला है। देश भर में सिटिंग (चेयर कार) वंदे भारत ट्रेनों की अपार सफलता के बाद, रेल मंत्रालय ने अब रात भर के लंबे सफर (Overnight Journeys) के लिए 50 नई और अत्याधुनिक ‘वंदे भारत स्लीपर’ (Vande Bharat Sleeper) ट्रेनों का संचालन शुरू करने का प्रस्ताव आधिकारिक रूप से केंद्रीय कैबिनेट को मंजूरी के लिए भेज दिया है। यह कदम राजधानी और दुरंतो एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेनों के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
राजधानी एक्सप्रेस से भी ज्यादा तेज और आरामदायक
प्रस्ताव के अनुसार, ये नई ‘वंदे भारत स्लीपर’ ट्रेनें पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से डिजाइन की गई हैं और ये 160 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति से दौड़ने में सक्षम होंगी। इन ट्रेनों के डिजाइन में यात्रियों के आराम (Passenger Comfort) को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। पुरानी ट्रेनों के मुकाबले इनमें झटके (Jerks) बिल्कुल महसूस नहीं होंगे और केबिन के अंदर आवाज (Noise insulation) भी न के बराबर होगी। इन स्लीपर ट्रेनों में विमानों जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी, जिनमें बेहतरीन कुशन वाले चौड़े बर्थ, सेंसर वाले बायो-वैक्यूम टॉयलेट, हर बर्थ के लिए अलग रीडिंग लाइट और यूएसबी चार्जिंग पोर्ट, तथा उन्नत वातानुकूलन (Advanced AC) प्रणाली शामिल हैं।
इन प्रमुख रूटों पर दौड़ेगी स्लीपर वंदे भारत
मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, पहले चरण में इन 50 स्लीपर ट्रेनों को देश के सबसे व्यस्त और लंबी दूरी के रूटों पर उतारा जाएगा। इनमें मुख्य रूप से दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-हावड़ा, चेन्नई-नई दिल्ली, और बेंगलुरु-पुणे जैसे स्वर्णिम चतुर्भुज (Golden Quadrilateral) मार्ग शामिल हैं। इन ट्रेनों के शुरू होने से इन शहरों के बीच यात्रा का समय मौजूदा राजधानी ट्रेनों के मुकाबले 2 से 3 घंटे तक कम हो जाएगा। यात्री रात को ट्रेन में सवार होकर सुबह तरोताजा होकर अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे।
कवच (Kavach) सुरक्षा प्रणाली से होंगी पूरी तरह लैस
तेज गति के साथ-साथ इन ट्रेनों में सुरक्षा के भी विश्वस्तरीय मानक तय किए गए हैं। सभी 50 नई स्लीपर ट्रेनें रेलवे की स्वदेशी एंटी-कोलिजन प्रणाली ‘कवच’ (Kavach System) से पूरी तरह लैस होंगी, जिससे दो ट्रेनों की टक्कर की संभावना शून्य हो जाएगी। इसके अलावा, हर कोच में सीसीटीवी कैमरे, फायर अलार्म सिस्टम और आपातकालीन टॉक-बैक (Talk-back) यूनिट्स लगी होंगी जिससे यात्री सीधे लोको पायलट से बात कर सकेंगे।
मेक इन इंडिया को मिलेगा बड़ा बूस्ट
रेल मंत्रालय को पूरी उम्मीद है कि आगामी कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को बिना किसी अड़चन के मंजूरी मिल जाएगी। इन 50 ट्रेनों का निर्माण चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) और अन्य भारतीय विनिर्माण इकाइयों में किया जाएगा, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ (Make in India) पहल को भारी बढ़ावा मिलेगा और हजारों नए रोजगार सृजित होंगे। रेलवे का यह आधुनिकीकरण भारतीय परिवहन व्यवस्था की सूरत बदलने वाला साबित होगा।



