भारत-वियतनाम रक्षा समझौता
नई दिल्ली में ब्रह्मोस मिसाइल और नौसैनिक सुरक्षा समेत 5 बड़े एमओयू पर ऐतिहासिक हस्ताक्षर

नई दिल्ली (डिफेंस एवं डिप्लोमैटिक डेस्क): इंडो-पैसिफिक (Indo-Pacific) क्षेत्र में चीन के बढ़ते दबदबे और आक्रामकता को संतुलित करने की दिशा में भारत ने एक बेहद कड़ा और रणनीतिक कदम उठाया है। वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम (To Lam) के भारत दौरे के दौरान आज नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति लाम के बीच उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता संपन्न हुई। इस ऐतिहासिक वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच रक्षा, सामरिक और समुद्री सुरक्षा को लेकर 5 बड़े समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इन समझौतों ने भारत और वियतनाम की ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ (Comprehensive Strategic Partnership) को एक नए और आक्रामक मुकाम पर पहुंचा दिया है।
ब्रह्मोस मिसाइल की नई खेप पर लगी मुहर
इस द्विपक्षीय वार्ता का सबसे बड़ा और अहम बिंदु ‘ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल’ (BrahMos Supersonic Cruise Missile) को लेकर हुआ समझौता रहा। फिलीपींस के बाद अब भारत, वियतनाम को ब्रह्मोस मिसाइल की एक नई और उन्नत खेप निर्यात करने जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, वियतनाम लंबे समय से अपने तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए इस घातक मिसाइल सिस्टम की मांग कर रहा था। ब्रह्मोस की तैनाती से वियतनामी नौसेना की मारक क्षमता में अप्रत्याशित वृद्धि होगी, जो सीधे तौर पर दक्षिण चीन सागर (South China Sea) में शक्ति संतुलन को प्रभावित करेगा। यह भारत की ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा निर्यात नीति की एक बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत है।
नौसैनिक सुरक्षा और सूचना साझाकरण पर जोर
5 एमओयू में से तीन मुख्य रूप से समुद्री सुरक्षा (Maritime Security) से जुड़े हैं। दोनों देशों ने ‘व्हाइट शिपिंग इंफॉर्मेशन एक्सचेंज’ (White Shipping Information Exchange) को और अधिक मजबूत करने का फैसला किया है। इसके तहत हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर में मौजूद किसी भी संदिग्ध व्यापारिक या सैन्य जहाज की सटीक जानकारी दोनों देशों की नौसेनाएं रियल-टाइम (Real-time) में एक-दूसरे के साथ साझा करेंगी। इसके अलावा, भारतीय नौसेना वियतनामी नौसैनिकों को उन्नत समुद्री युद्ध कौशल और पनडुब्बी संचालन का विशेष प्रशिक्षण भी प्रदान करेगी।
चीन के लिए स्पष्ट और कड़ा संदेश
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि नई दिल्ली में हुए ये रक्षा समझौते चीन के लिए एक सीधा कूटनीतिक संदेश हैं। जिस तरह चीन भारत के पड़ोसियों (जैसे पाकिस्तान और मालदीव) के साथ अपने सैन्य संबंध बढ़ा रहा है, उसी तर्ज पर भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ (Act East Policy) के तहत वियतनाम के साथ यह रक्षा साझेदारी बीजिंग को उसी की भाषा में जवाब है। इसके अतिरिक्त, दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा और सैन्य रसद (Military Logistics) के आदान-प्रदान पर भी समझौते किए हैं। यह दौरा निश्चित रूप से एशिया की भू-राजनीति में एक बड़ा बदलाव लाने जा रहा है।



