कनाडा के विदेशी हस्तक्षेप वाले दावे बेबुनियाद: विदेश मंत्रालय

कनाडाई खुफिया एजेंसी कनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस (सीएसआईएस) ने भारत पर उसके देश में हस्तक्षेप का आरोप लगाया है। भारत ने आरोपों को “बेबुनियाद” करार देते हुए सिरे से खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अन्य देशों की संप्रभुता का सम्मान करता है और किसी भी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप उसकी नीति नहीं है।
भारत एक लोकतांत्रिक देश है जो अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करता है और दूसरे देशों की संप्रभुता का सम्मान करता है। दूसरे देशों के मामलों में दखल देना हमारी नीति नहीं है। हमारा मानना है कि ऐसे मसलों की राजनीतिक या सार्वजनिक मंचों पर चर्चा के बजाए तय प्रक्रिया के तहत सुलझाया जाना चाहिए।”
अपनी नवीनतम ‘पब्लिक रिपोर्ट 2025’ में, सीएसआईएस ने कहा कि कनाडा की राजनीति में विदेशी दखलंदाजी बहुत ज्यादा और आक्रामक है। रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य अपराधी—चीन, रूस, ईरान और पाकिस्तान—संस्थाओं को कमजोर करने, लोगों की मनस्थिति को प्रभावित करने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भरोसा खत्म करने के लिए अलग-अलग पैंतरे का इस्तेमाल करते हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि कनाडा-बेस्ड खालिस्तानी एक्सट्रीमिस्ट्स (सीबीकेई) की हिंसक चरमपंथी गतिविधियों में लगातार शामिल होना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बना हुआ है।
विदेश मंत्रालय ने भारत के पुराने रुख को फिर स्पष्ट किया। कहा कि भारत ने चरमपंथियों और अलगाववादियों द्वारा कनाडाई इलाके को पनाहगाह के तौर पर इस्तेमाल करने की जानकारी समय-समय पर दी है।
भारत ने बार-बार कनाडाई अधिकारियों से अपनी जमीन से काम कर रहे भारत विरोधी तत्वों के खिलाफ असरदार कार्रवाई करने की अपील की है। इसमें हिंसा का महिमामंडन, राजनयिकों और नेताओं को धमकियां देना, पूजा स्थलों में तोड़-फोड़ करना और तथाकथित जनमत संग्रहों के जरिए अलगाववाद को बढ़ावा देने की कोशिशें जैसे मुद्दे शामिल हैं।



