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भारत-ब्रिटेन व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार, CETA के जरिए निवेश बढ़ाने पर हुई बड़ी चर्चा 

भारत और ब्रिटेन ने द्विपक्षीय व्यापार व निवेश को बढ़ावा देने और पिछले साल जुलाई में हस्ताक्षर किए गए व्यापक आर्थिक व व्यापार समझौते के तहत अवसरों का लाभ उठाने के तरीकों पर चर्चा की।

वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटेन के व्यापार व वाणिज्य राज्य सचिव पीटर काइल के बीच हुई वर्चुअल बैठक में इस पर चर्चा हुई। गोयल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा, ‘हमने भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) के तहत अवसरों का पूरा लाभ उठाते हुए अपने व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों पर विचार किया।’

भारत और ब्रिटेन ने 24 जुलाई, 2025 को सीईटीए पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत 99 प्रतिशत भारतीय निर्यात ब्रिटिश बाजार में शून्य शुल्क पर प्रवेश करेंगे जबकि कारों व व्हिस्की जैसे ब्रिटिश उत्पादों पर भारत में शुल्क कम किया जाएगा। सीईटीए का लक्ष्य 2030 तक दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच 56 अरब अमेरिकी डॉलर के व्यापार को दोगुना करना है।

यूएई से समझौता, कारोबार 100 अरब डॉलर के पार
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि मई, 2022 में लागू हुए भारत-यूएई मुक्त व्यापार समझौते से द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर के पार पहुंचने में मदद मिली है।

यूएई के साथ व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) हुआ है। दरअसल, यूएई के साथ समझौता अफ्रीका, अन्य जीसीसी और मध्य पूर्वी देशों, सीआईएस (स्वतंत्र राज्यों के राष्ट्रमंडल) देशों और कुछ यूरोपीय देशों के लिए प्रवेश द्वार का काम करता है।

उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि द्विपक्षीय माल व्यापार में मजबूत वृद्धि हुई है और यह 100 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है। सेवाओं का व्यापार भी लगातार बढ़ रहा है और यह समझौता नए बाजारों और अधिक मूल्य के द्वार खोल रहा है।

द्विपक्षीय व्यापार 2025-26 में 101.25 अरब डॉलर रहा जबकि यह 2024-25 में 100.03 अरब डॉलर था। रत्न और आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि जैसे प्रमुख क्षेत्रों में व्यापार का विस्तार हुआ है। वर्ष 2025-26 के दौरान संयुक्त अरब अमीरात को भारत का निर्यात लगभग 2 प्रतिशत बढ़कर 37.36 अरब डॉलर हो गया जबकि आयात 0.77 प्रतिशत बढ़कर 63.89 अरब डॉलर हो गया। लिहाजा 26.53 अरब डॉलर का व्यापार घाटा हुआ। अप्रैल-दिसंबर 2025-26 के दौरान संयुक्त अरब अमीरात से भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 2.45 अरब डॉलर रहा। यह वर्ष 2024-25 में 4.34 अरब डॉलर था।

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