भारत रक्षा पर खर्च करने वाला पांचवां बड़ा देश बना, बजट 92.1 अरब डॉलर

भारत वर्ष 2025 में रक्षा पर सबसे अधिक खर्च करने वाले देशों में पांचवें पायदान पर रहा। पिछले साल रक्षा पर भारत का व्यय बढ़कर 92.1 अरब डॉलर हो गया। स्टॉकहोम इंटरनैशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) के नवीनतम आंकड़ों में यह कहा गया है।
यह इजाफा पिछले वर्ष की तुलना में 8.9 प्रतिशत अधिक है। मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े क्षेत्रीय तनाव के बाद रक्षा व्यय में यह वृद्धि दिखी है। पिछले साल अप्रैल में पहलगाम में पर्यटकों पर हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था और सैन्य झड़प हुई थी जिसमें लड़ाकू विमान, ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ था।
पाकिस्तान ने भी बढ़ाया सैन्य बजट
इस रिपोर्ट में 31वें स्थान पर रहे पाकिस्तान ने भी संघर्ष के बाद चीन से विमान और मिसाइल प्रणालियां खरीद बढ़ा दी। इस वजह से वर्ष 2025 में उसका रक्षा व्यय बढ़कर 11.9 अरब डॉलर हो गया जो 11 प्रतिशत का इजाफा है। पाकिस्तान का सैन्य व्यय उसके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 2.9 प्रतिशत था जो संघर्ष के बाद की तात्कालिक जरूरत और सैन्य क्षमता बनाए रखने के दीर्घकालिक प्रयास दोनों को दर्शाता है। जीडीपी के हिस्से के रूप में भारत का सैन्य व्यय 2.3 प्रतिशत है जो पाकिस्तान से थोड़ा कम है।
संघर्ष के बीच वैश्विक संतुलन :
विश्व का सैन्य व्यय 2025 में 2,887 अरब डॉलर के भारी भरकम स्तर पर पहुंच गया। लगातार 11वें वर्ष दुनिया में सैन्य व्यय में इजाफा हुआ जो वैश्विक जीडीपी का 2.5 प्रतिशत है।
अमेरिका 954 अरब डॉलर के साथ रक्षा पर सबसे अधिक खर्च करने वाला देश रहा जो वैश्विक व्यय का 33 प्रतिशत है। हालांकि विदेश में आवंटन में कमी के कारण इसमें 7.5 प्रतिशत की गिरावट आई है।
चीन रक्षा पर सबसे अधिक खर्च करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश रहा जिसने अपने सैन्य बजट में 7.4 प्रतिशत की वृद्धि कर उसे के अनुमानित 336 अरब डॉलर तक पहुंचा दिया। यह रक्षा पर वैश्विक व्यय का लगभग 12 प्रतिशत है।
वर्ष 2022 से यूक्रेन के साथ युद्ध में उलझे रूस ने भी रक्षा पर व्यय 5.9 प्रतिशत बढ़ाकर लगभग 190 अरब डॉलर तक पहुंचा दिया। उसका रक्षा व्यय सकल घरेलू उत्पाद का 7.5 प्रतिशत के स्तर तक पहुंच गया। जर्मनी और भारत के साथ मिलकर इन देशों (विश्व में रक्षा पर व्यय करने वाले पांच सबसे बड़े देश) की 2025 में कुल वैश्विक रक्षा व्यय में 58 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।
आंकड़ों से सैन्यीकरण में एक व्यापक प्रवृत्ति का भी पता चलता है, विशेष रूप से एशिया और ओशिनिया में जहां खर्च 681 अरब डॉलर था (2024 से 8.1 प्रतिशत की वृद्धि)। यह वृद्धि बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्द्धा और भारत-पाकिस्तान संघर्ष तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में तनाव जैसे संवेदनशील मुद्दों के कारण हुई है।
विश्व का सैन्य व्यय 2025 में 2,887 अरब डॉलर के भारी भरकम स्तर पर पहुंच गया। लगातार 11वें वर्ष दुनिया में सैन्य व्यय में इजाफा हुआ जो वैश्विक जीडीपी का 2.5 प्रतिशत है।
अमेरिका 954 अरब डॉलर के साथ रक्षा पर सबसे अधिक खर्च करने वाला देश रहा जो वैश्विक व्यय का 33 प्रतिशत है। हालांकि विदेश में आवंटन में कमी के कारण इसमें 7.5 प्रतिशत की गिरावट आई है।
चीन रक्षा पर सबसे अधिक खर्च करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश रहा जिसने अपने सैन्य बजट में 7.4 प्रतिशत की वृद्धि कर उसे के अनुमानित 336 अरब डॉलर तक पहुंचा दिया। यह रक्षा पर वैश्विक व्यय का लगभग 12 प्रतिशत है।
वर्ष 2022 से यूक्रेन के साथ युद्ध में उलझे रूस ने भी रक्षा पर व्यय 5.9 प्रतिशत बढ़ाकर लगभग 190 अरब डॉलर तक पहुंचा दिया। उसका रक्षा व्यय सकल घरेलू उत्पाद का 7.5 प्रतिशत के स्तर तक पहुंच गया। जर्मनी और भारत के साथ मिलकर इन देशों (विश्व में रक्षा पर व्यय करने वाले पांच सबसे बड़े देश) की 2025 में कुल वैश्विक रक्षा व्यय में 58 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।



