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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ऑस्ट्रेलिया को ट्रेकोमा मुक्त घोषित किया 

हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने ऑस्ट्रेलिया को ट्रेकोमा को एक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में खत्म करने के लिए मान्यता दी है। इसका मतलब है कि अब यह बीमारी देश में व्यापक स्तर पर लोगों के लिए खतरा नहीं रही। यह उपलब्धि न केवल ऑस्ट्रेलिया के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक प्रेरणा है।

ऑस्ट्रेलिया अब उन देशों की सूची में शामिल हो गया है जिन्होंने इस बीमारी को सफलतापूर्वक नियंत्रित कर लिया है। यह वैश्विक स्तर पर उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों (नेग्लेक्टेड ट्रॉपिकल डिसीसिस) को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया में ट्रेकोमा मुख्य रूप से दूर-दराज के आदिवासी इलाकों में पाया जाता था। जहां देश के अन्य हिस्सों से यह बीमारी पहले ही खत्म हो चुकी थी, वहीं इन समुदायों में यह लंबे समय तक बनी रही। इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार और स्थानीय संगठनों ने मिलकर काम किया। ऑस्ट्रेलिया ने 2006 में राष्ट्रीय ट्रेकोमा प्रबंधन कार्यक्रम शुरू किया। इस कार्यक्रम के तहत डब्ल्यूएचओ की साफी रणनीति अपनाई गई। इसमें सर्जरी, एंटीबायोटिक दवाएं, चेहरे की साफ-सफाई और पर्यावरण सुधार जैसे उपाय शामिल थे।

ट्रेकोमा उन 21 बीमारियों में से एक है जिन्हें उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग कहा जाता है। ये बीमारियां आमतौर पर गरीब और पिछड़े इलाकों में ज्यादा पाई जाती हैं, जहां साफ पानी, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी होती है। ट्रेकोमा आंखों की एक संक्रामक बीमारी है, जो क्लैमाइडिया ट्रैकोमैटिस नामक बैक्टीरिया से फैलती है। यह दुनिया में अंधेपन का सबसे बड़ा संक्रामक कारण माना जाता है। यह बीमारी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने, गंदे हाथों, दूषित सतहों और मक्खियों के जरिए फैलती है। अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए तो बार-बार संक्रमण होने से पलकों के अंदर की तरफ मुड़ने लगती हैं, जिससे आंखों को नुकसान पहुंचता है और अंत में अंधापन हो सकता है।

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