नई दिल्ली में राष्ट्रीय सुरक्षा शिखर सम्मेलन के दूसरे चरण को रक्षा मंत्री ने किया संबोधित

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय सुरक्षा शिखर सम्मेलन के दूसरे चरण को संबोधित करते हुए कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर ने विश्व को यह संदेश दिया है कि भारत किसी भी परिस्थिति में किसी भी आतंकवादी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगा। नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सुरक्षा शिखर सम्मेलन के दूसरे चरण में श्री सिंह ने कहा कि देश अब उस पुरानी मानसिकता के साथ आगे नहीं बढ़ता, जहां हमारी धरती पर आतंकवादी हमले होते रहे और हम केवल कूटनीतिक बयान जारी करते रहे। उन्होंने आतंकवाद और उसके प्रायोजकों के बीच कोई भेद न करने की सरकारी नीति को दोहराया। उन्होंने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का केंद्र और भारत को सूचना प्रौद्योगिकी का केंद्र बताया।
श्री सिंह ने नई विश्व व्यवस्था की आवश्यकताओं और इसके विभिन्न आयामों के अनुसार शासन को अनुकूलित करने पर जोर दिया। उन्होंने इस बदलती विश्व व्यवस्था में और भी अधिक सतर्कता के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता पर भी बल दिया। पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच हो रहे तीव्र परिवर्तनों का उल्लेख करते हुए श्री सिंह ने कहा कि देश को एक ऐसी प्रणाली अपनाने की आवश्यकता है जहां प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान और गरिमा प्राप्त हो, जहां कोई भी मतभेद विवाद का रूप न ले और कोई भी विवाद विनाश का कारण न बने। उन्होंने देश में एआई की भूमिका पर भी प्रकाश डाला और कहा कि यह तकनीक भारतीय सेनाओं का अभिन्न अंग बन गई है। उन्होंने कहा कि इस नई विश्व व्यवस्था में, एआई किसी भी देश की रणनीतिक तैयारियों का एक अनिवार्य हिस्सा बन रही है।
रक्षा मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38 हजार 424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 62 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों को और बढ़ाने के प्रयास जारी हैं। श्री सिंह ने कहा कि सरकार पूरे देश में कंप्यूटिंग अवसंरचना के लोकतंत्रीकरण के लिए काम कर रही है, जिससे छोटे शहरों के युवा एआई के क्षेत्र में योगदान दे सकें। उन्होंने कहा कि जीपीयू क्षमता का विस्तार, फ्यूचरस्किल्स कार्यक्रम और डेटा और एआई लैब की स्थापना जैसी पहलें तकनीकी क्रांति में अग्रणी बने रहने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।



