आम आदमी पार्टी में बड़ी टूट के संकेत? ‘शक्ति प्रदर्शन’ की बैठक से पंजाब के 30 विधायक रहे नदारद

आम आदमी पार्टी (AAP) इस समय अपने राजनीतिक सफर के सबसे गहरे और गंभीर संकट से गुजर रही है। पार्टी को हाल ही में लगे झटकों के बाद, अब पंजाब में भी बगावत के सुर तेज होते दिख रहे हैं। न्यूज़18 की रिपोर्ट के अनुसार, अपने कुनबे को एकजुट दिखाने और ‘शक्ति प्रदर्शन’ (Show of Strength) के उद्देश्य से पार्टी आलाकमान द्वारा बुलाई गई एक अहम बैठक उस समय फीकी पड़ गई, जब पंजाब के लगभग 30 विधायक इस बैठक से नदारद रहे। इस घटना ने राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज कर दी है कि क्या आम आदमी पार्टी में जल्द ही विधायकों का कोई और बड़ा पलायन (Exodus) होने वाला है?
अस्तित्व का संकट और डैमेज कंट्रोल की कोशिश:
रिपोर्ट के मुताबिक, आम आदमी पार्टी वर्तमान में एक प्रकार के “अस्तित्व के संकट” (Existential crisis) का सामना कर रही है। हाल ही में पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों ने पाला बदलते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया था। इस बड़े दलबदल ने पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को हिला कर रख दिया है। इसी डैमेज कंट्रोल के तहत और जनता के बीच एकजुटता का संदेश देने के लिए, आम आदमी पार्टी ने पंजाब के अपने सभी विधायकों की यह महत्वपूर्ण बैठक बुलाई थी। पार्टी यह दिखाना चाहती थी कि भले ही कुछ वरिष्ठ नेता पार्टी छोड़ गए हों, लेकिन पंजाब में उनकी सरकार और विधायक पूरी तरह से एकजुट और मजबूत हैं।
जालंधर की बैठक में सामने आई कड़वी सच्चाई:
पार्टी की यह ‘एकजुटता’ दिखाने की कोशिश उस समय कमजोर पड़ती नजर आई जब उपस्थिति के वास्तविक आंकड़े सामने आए। पंजाब विधानसभा में आम आदमी पार्टी के कुल 94 विधायक हैं। यह अहम बैठक जालंधर की एक निजी यूनिवर्सिटी (Private University) में आयोजित की गई थी। लेकिन प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस बैठक में 94 में से केवल 65 विधायक ही पहुंचे। शेष लगभग 30 विधायकों ने इस शक्ति प्रदर्शन से दूरी बनाए रखी और वे बैठक में शामिल नहीं हुए।
30 विधायकों की गैरमौजूदगी के क्या हैं मायने?
इतनी बड़ी संख्या में सत्ताधारी दल के विधायकों का पार्टी की सबसे महत्वपूर्ण बैठक से किनारा करना कोई सामान्य राजनीतिक घटना नहीं है। यह सीधे तौर पर पार्टी नेतृत्व के प्रति असंतोष और किसी बड़ी राजनीतिक खिचड़ी के पकने का स्पष्ट संकेत देता है। 7 राज्यसभा सांसदों के दलबदल के बाद, अब अगर ये 30 विधायक भी बगावती तेवर अपनाते हैं या पाला बदलते हैं, तो यह भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की स्थिरता के लिए एक बड़ा और गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण बन गया है। जालंधर की इस बैठक ने यह साफ कर दिया है कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। 30 विधायकों की यह चुप्पी और दूरी किसी बड़े तूफान से पहले की शांति हो सकती है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान डैमेज कंट्रोल के लिए क्या कदम उठाते हैं और जो विधायक इस बैठक से नदारद रहे, उनका अगला राजनीतिक दांव क्या होता है। क्या आम आदमी पार्टी इस ‘अस्तित्व के संकट’ से उबर पाएगी या यह पंजाब में किसी बड़े राजनीतिक फेरबदल की शुरुआत है, इसका जवाब आने वाले कुछ ही दिनों में मिल जाएगा।



