देश में लगभग सार्वभौमिक बैंकिंग कवरेज हासिल हो चुकी है : वित्त मंत्रालय

नई दिल्ली ( राघवेंद्र प्रताप सिंह) : वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में जानकारी दी है कि देश में लगभग सार्वभौमिक बैंकिंग कवरेज हासिल हो चुकी है। बैंकों द्वारा जन धन दर्शक (जेडीडी) ऐप पर अपलोड किए गए आंकड़ों के अनुसार, 99.92 प्रतिशत आबाद गांवों (6,01,328 में से 6,00,868) में अब पांच किमी के दायरे में एक बैंकिंग शाखा (बैंक/बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट/ इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) मौजूद है।
17 जुलाई तक, इस बैंकिंग विस्तार को 1.81 लाख से अधिक बैंक शाखाओं, 17.36 लाख बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स (बीसी) और 1.65 लाख आईपीपीबी केंद्रों के मजबूत बुनियादी ढांचे का सहयोग प्राप्त है।
ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं की सुलभता सुनिश्चित करने के लिए, सरकार का प्रयास है कि देश के सभी आबाद गांवों के 5 किलोमीटर के दायरे में एक बैंकिंग केंद्र (बैंक शाखा/बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट/इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक) उपलब्ध हो। इसके अलावा, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वाणिज्यिक बैंकों, लघु वित्त बैंकों, भुगतान बैंकों, स्थानीय क्षेत्र बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को पूर्व अनुमति के बिना देश में कहीं भी बैंक शाखाएं खोलने की अनुमति दी है, बशर्ते कि 25 प्रतिशत शाखाएं बैंकिंग सुविधाओं से वंचित ग्रामीण क्षेत्रों में हों।
इसके अलावा, आरबीआई के मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार, जिन क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, वहां बैंकिंग आउटलेट खोलना एक सतत प्रक्रिया है। इसकी देखरेख राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) / केंद्र शासित प्रदेश स्तरीय बैंकर्स समिति (यूटीएलबीसी) सम्बंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकार, सदस्य बैंकों और अन्य हितधारकों के परामर्श से करती है। बैंक, अन्य बातों के अलावा, आरबीआई के निर्देशों, अपनी व्यावसायिक योजनाओं और उनकी व्यावसायिक व्यवहार्यता के आलोक में बैंकिंग आउटलेट खोलने के प्रस्तावों पर विचार करते हैं।
कृषि ऋण के वितरण में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा कई कदम उठाए गए हैं, इनमें अन्य बातों के अलावा यह भी शामिल हैं:
जन समर्थ पोर्टल को सरकारी ऋणों और सब्सिडी योजनाओं को जोड़ने के लिए एक ही स्थान पर सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में शुरू किया गया है। यह ऋण आवेदन करने और आवेदक के डेटा के डिजिटल मूल्यांकन के आधार पर समय पर ऋण स्वीकृत कराने का एक त्वरित और कुशल तरीका प्रदान करता है।
कृषि ऋण वितरण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए विभिन्न डिजिटल पहल शुरू की गई हैं। इनमें नाबार्ड द्वारा विकसित ई-केवाईसी एप्लिकेशन, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा विकसित कृषिका और लाभार्थियों की पहचान, संपर्क, ऋण आवेदन प्रसंस्करण और निगरानी में सहायता के लिए बैंकों द्वारा विकसित इसी तरह के डिजिटल एप्लिकेशन शामिल हैं।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा सितंबर 2023 में किसान ऋण पोर्टल (केआरपी) का शुभारंभ किया गया है। यह आधार-आधारित लाभार्थी सत्यापन और केसीसी के माध्यम से लिए गए ऋणों के लिए संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना (एमआईएसएस) के तहत तेजी से डिजिटल दावा निपटान को सक्षम बनाता है।



