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विवेकानंद ने जिस निरंजन मठ में 144 साल पहले दिया दिव्य ज्ञान, वहां बना विवेका स्मारक, उद्घाटन करेंगे PM मोदी

नई दिल्ली ( इंडियन व्यू टीम) : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1 अगस्त को कर्नाटक के मैसूरु जिले का दौरा करेंगे और वहां स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक युवा केंद्र यानी विवेक स्मारक का उद्घाटन करेंगे.यह स्मारक उसी पवित्र जगह पर बना है, जहां कभी निरंजन मठ पुराना अनाथालय हुआ करता था.नवंबर 1892 में जब स्वामी विवेकानंद घुमक्कड़ साधु के तौर पर मैसूर आए थे और यहीं ठहरे थे. मैसूरु के तब राजा रहे चामराजेंद्र वोडियार दशम से उनकी मुलाकात हुई थी.उन्होंने ही स्वामी विवेकानंद के लिए शिकागो विश्व धर्म संसद (1893) में जाने के लिए धन की मदद की थी।

निरंजन मठ का इतिहास :

मैसूरु के नारायण शास्त्री रोड पर निरंजन मठ का इतिहास लंबा है और शिव मंदिर के साथ जुड़ा है. यह मैसूर रियासत के तत्कालीन दीवान (प्रमुख) के शेषाद्रि अय्यर के निवास (शेषाद्रि भवन) के ठीक पास में था.स्वामी विवेकानंद नवंबर 1892 में एक अनाम साधु संन्यासी के तौर पर बेंगलुरु से मैसूरु पहुंचे थे तो पहले इसी निरंजन मठ में ठहरे थे. इसी मठ में स्वामी विवेकानंद ने सद्विद्या पाठशाला में विद्वानों संग शास्त्रार्थ किया. उनके विचारों ने सबको प्रभावित किया. दीवान शेषाद्रि अय्यर भी मठ में ठहरे दिव्य संन्यासी स्वामी विवेकानंद के असाधारण ज्ञान, संस्कृत के साथ-साथ और अंग्रेजी पर विशेषज्ञता का पता चला.स्वामी विवेकानंद के व्यक्तित्व और विचारों से वो बहुत प्रभावित हुए।

महाराजा चामराजेंद्र वोडियार से भेंट :

दीवान शेषाद्रि अय्यर ने उन्हें मैसूरु के युवा महाराजा चामराजेंद्र वोडियार दशम से मिलने का न्योता दिया. चामराजेंद्र वोडियार स्वामी विवेकानंद के साथ पहली ही बातचीत में ज्ञान से ओतप्रोत हो गए. उन्होंने स्वामी विवेकानंद को निरंजन मठ से महल में शाही अतिथि बनने का अनुरोध किया. महल में महाराजा, दरबार के विद्वानों और विदेशी मेहमानों के साथ धर्म, दर्शन और भारत को लेकर शास्त्रार्थ हुआ. महाराजा वोडियार ने स्वामी जी की आवाज को शुरुआती ग्रामोफोन में भी रिकॉर्ड की थी।

विवेकानंद की शिकागो यात्रा :

स्वामी जी ने महाराजा से कहा कि भारत के पास आध्यात्मिक और दार्शनिक ज्ञान का विशाल भंडार है, लेकिन उसे पश्चिमी विज्ञान, तकनीक और शिक्षा की जरूरत है. वो अमेरिका के शिकागो में विश्व धर्म सम्मेलन में जाकर वेदांत का संदेश देना चाहते हैं. वोडियार ने तुरंत घोषणा की कि वे स्वामी जी की शिकागो यात्रा का पूरा खर्च उठाएंगे. उन्होंने स्वामी जी को यात्रा के लिए जहाज का खर्च, पोशाक और वित्तीय मदद की।

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