असम में बाढ़ का कहर जारी: कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर, मरने वालों की संख्या बढ़ी, एनडीआरएफ (NDRF) के रेस्क्यू ऑपरेशन तेज

राघवेंद्र प्रताप सिंह/ गुवाहाटी: पूर्वोत्तर राज्य असम में इस साल मॉनसून की बारिश ने भयानक तबाही मचाई है और राज्य के लाखों लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) द्वारा जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, ब्रह्मपुत्र, बराक और उनकी प्रमुख सहायक नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही हैं। राज्य के 35 में से 28 जिले इस समय भयंकर बाढ़ की चपेट में हैं और अब तक बाढ़ और भूस्खलन से जुड़ी घटनाओं में मरने वालों की संख्या बढ़कर 45 के पार पहुंच गई है।
लाखों लोग प्रभावित, राहत शिविरों में शरण
बाढ़ का पानी धुबरी, बारपेटा, नगांव, कछार और कामरूप जिलों के हजारों गांवों में घुस चुका है, जिससे लगभग 30 लाख से अधिक की आबादी सीधे तौर पर प्रभावित हुई है। लोगों के घर, खेत और मवेशी सब पानी में डूब गए हैं। राज्य सरकार ने युद्ध स्तर पर काम करते हुए प्रभावित जिलों में 1,500 से अधिक राहत शिविर (Relief Camps) स्थापित किए हैं, जहां लाखों विस्थापित लोगों को शरण दी गई है। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (Kaziranga National Park) का भी 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पानी में डूब गया है, जिससे गैंडों और अन्य वन्यजीवों को ऊंचे स्थानों पर पलायन करना पड़ रहा है।
एनडीआरएफ और सेना का मोर्चा
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की कई अतिरिक्त कंपनियों को असम भेजा गया है। भारतीय सेना, वायुसेना (IAF) और राज्य आपदा बल (SDRF) की टीमें भी राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। वायुसेना के हेलीकॉप्टरों द्वारा उन सुदूर इलाकों में खाने के पैकेट, दवाइयां और पीने का पानी एयर-ड्रॉप किया जा रहा है, जिनका संपर्क मुख्य मार्गों से पूरी तरह कट चुका है।
मुख्यमंत्री ने केंद्र से मांगी मदद
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा लगातार बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण कर रहे हैं और राहत शिविरों का जायजा ले रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से टेलीफोन पर बात कर राज्य के हालात की जानकारी दी है। केंद्र सरकार ने असम को हर संभव वित्तीय और रसद सहायता मुहैया कराने का आश्वासन दिया है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों में असम और मेघालय में और अधिक बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे प्रशासन की चिंताएं और बढ़ गई हैं।



