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दिल्ली हाईकोर्ट का सख्त फैसला: एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने से किया इनकार, सफदरजंग अस्पताल में ही चलेगा इलाज

अभिषेक सिंह/ नई दिल्ली: सुप्रसिद्ध पर्यावरण और शिक्षा कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के इलाज और नजरबंदी के मामले में मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो द्वारा दायर उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उन्हें सफदरजंग अस्पताल से निकालकर किसी निजी (Private) अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग की गई थी। कोर्ट के इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि वांगचुक का इलाज फिलहाल सरकारी देखरेख में ही जारी रहेगा।

याचिका में क्या थे आरोप?

वांगचुक की पत्नी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से वांगचुक को जबरन उठाया और सफदरजंग अस्पताल में ‘अवैध रूप से नजरबंद’ (Illegal Detention) कर दिया। उनका दावा था कि वांगचुक की बिगड़ती सेहत के बावजूद उन्हें उनके परिवार के सदस्यों और वकीलों से मिलने नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने वांगचुक को तुरंत मेदांता या अपोलो जैसे किसी उच्च-स्तरीय निजी अस्पताल में ले जाने की इजाजत मांगी थी।

कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए सरकार और अस्पताल प्रशासन की रिपोर्ट का बारीकी से अध्ययन किया। अदालत ने कड़े शब्दों में कहा कि “सफदरजंग अस्पताल देश के सबसे बेहतरीन और सर्व-सुविधायुक्त सरकारी अस्पतालों में से एक है। वहां के विशेषज्ञ डॉक्टर वांगचुक के स्वास्थ्य की 24 घंटे निगरानी कर रहे हैं। किसी भी मरीज को केवल इसलिए प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने का आदेश नहीं दिया जा सकता क्योंकि वह एक चर्चित चेहरा है।”

सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला

दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि वांगचुक के अनशन (‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के समर्थन में) के कारण दिल्ली में कानून-व्यवस्था की स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। उन्हें निजी अस्पताल में ले जाने से समर्थकों की भारी भीड़ जुट सकती है, जिससे आम मरीजों को परेशानी होगी। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए पुलिस को निर्देश दिया कि वे वांगचुक की पत्नी और उनके वकील को अस्पताल के नियमों के तहत उनसे मिलने की अनुमति दें, लेकिन मेडिकल शिफ्टिंग की मांग को खारिज कर दिया।

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