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उत्तर और पूर्वी भारत में मॉनसून का कहर: जम्मू- कश्मीर, उत्तराखंड और नगालैंड में भारी बारिश से 17 लोगों की दर्दनाक मौत

पल्लवी श्रीवास्तव/ नई दिल्ली / श्रीनगर: इस साल का मॉनसून देश के पहाड़ी राज्यों के लिए एक बड़ा काल बनकर टूटा है। पिछले 48 घंटों के दौरान उत्तर और पूर्वी भारत के कई राज्यों में अत्यधिक भारी बारिश, भूस्खलन (Landslides) और बादल फटने (Cloudburst) की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई है। आपदा प्रबंधन अधिकारियों की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और नगालैंड में अलग-अलग प्राकृतिक हादसों में अब तक 17 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग लापता बताए जा रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर: बादल फटने से तबाही

सबसे दुखद घटना जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा और गांदरबल जिलों से सामने आई है, जहां बीती रात बादल फटने से अचानक आई फ्लैश फ्लड (Flash Flood) ने कई गांवों को अपनी चपेट में ले लिया। पानी के तेज बहाव में कई घर, गाड़ियां और मवेशी बह गए। इस त्रासदी में 8 लोगों के शव बरामद किए गए हैं। सेना और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें मलबे में दबे लोगों की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग भी भूस्खलन के कारण पूरी तरह से बंद हो गया है।

उत्तराखंड: चारधाम यात्रा मार्गों पर भूस्खलन

उत्तराखंड में भारी बारिश का दौर जारी है, जिससे केदारनाथ और बद्रीनाथ यात्रा मार्गों पर जगह-जगह भारी भूस्खलन हुआ है। रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों में पहाड़ दरकने से 5 लोगों की मौत हो गई। गौरीकुंड हाईवे पर मलबा गिरने से हजारों तीर्थयात्री रास्ते में फंस गए हैं। मुख्यमंत्री ने प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा है और मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक राज्य के सात जिलों में ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है। हेलीकॉप्टर सेवाएं भी खराब मौसम के कारण निलंबित कर दी गई हैं।

नगालैंड में नदियां उफान पर

पूर्वोत्तर भारत में नगालैंड और असम के हालात भी बदतर हो गए हैं। नगालैंड के दीमापुर और कोहिमा में लगातार हो रही बारिश से दीमापुर नदी का जलस्तर खतरे के निशान से बहुत ऊपर चला गया है। यहां बाढ़ के पानी में डूबने और मकान ढहने से 4 लोगों की जान चली गई।

केंद्र सरकार ने स्थिति का जायजा लेते हुए प्रभावित राज्यों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। NDRF की अतिरिक्त कंपनियों को एयरलिफ्ट कर आपदा प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जा रहा है। मौसम की यह मार एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में अनियोजित विकास और जलवायु परिवर्तन के भयानक परिणामों की ओर इशारा कर रही है।

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