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आंध्र प्रदेश में ‘जनसंख्या नियंत्रण’ का युग समाप्त: सीएम चंद्रबाबू नायडू का बड़ा ऐलान, अब राज्य में लागू होगी ‘जनसंख्या संरक्षण और प्रबंधन’ नीति

राघवेंद्र प्रताप सिंह/  अमरावती: भारत के दक्षिणी राज्यों में जनसांख्यिकीय बदलाव (Demographic Shift) और तेजी से बूढ़ी होती आबादी अब सरकारों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है। इसी खतरे को भांपते हुए आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने एक बेहद साहसिक और ऐतिहासिक फैसला लिया है। दशकों पुरानी ‘जनसंख्या नियंत्रण’ (Population Control) की नीति को पलटते हुए, मुख्यमंत्री ने राज्य में अब ‘जनसंख्या संरक्षण और प्रबंधन’ (Population Conservation and Management) नीति लागू करने का आधिकारिक ऐलान किया है।

क्यों पलटी गई पुरानी नीति?

1990 के दशक में भारत में जनसंख्या विस्फोट को रोकने के लिए ‘हम दो, हमारे दो’ का नारा दिया गया था, जिसे दक्षिणी राज्यों ने सबसे सख्ती से लागू किया था। लेकिन अब इसके गंभीर परिणाम सामने आ रहे हैं।
सीएम नायडू ने अपने नीतिगत संबोधन में स्पष्ट किया कि आंध्र प्रदेश की प्रजनन दर (Fertility Rate) गिरकर 1.5 पर आ गई है, जो रिप्लेसमेंट रेट (2.1) से काफी नीचे है। इसका सीधा मतलब है कि राज्य में युवाओं की संख्या तेजी से घट रही है और बुजुर्गों (Aging Population) की संख्या बढ़ रही है। यदि यही स्थिति रही तो आने वाले 20 वर्षों में राज्य में काम करने वाले युवाओं का भारी अकाल (Workforce Shortage) हो जाएगा, जैसा कि आज जापान और कुछ यूरोपीय देश झेल रहे हैं।

क्या है ‘जनसंख्या संरक्षण’ नीति?

नई नीति के तहत राज्य सरकार अब जोड़ों (Couples) को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करेगी।

  • * नई प्रोत्साहन योजनाएं: जो दंपत्ति दो से अधिक बच्चे पैदा करेंगे, उन्हें सरकारी नौकरियों में अतिरिक्त तरजीह, स्वास्थ्य सुविधाओं में विशेष लाभ और बच्चों की शिक्षा के लिए विशेष अनुदान (Financial Incentives) दिए जाने का खाका तैयार किया जा रहा है।
  • * स्थानीय चुनाव नियमों में बदलाव: इससे पहले जिन लोगों के दो से अधिक बच्चे होते थे, वे पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकते थे। नई नीति के तहत इस प्रतिबंध को भी हटाने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

सीएम नायडू का यह फैसला न केवल आंध्र प्रदेश बल्कि पूरे दक्षिण भारत के लिए एक बड़ा ‘वेक-अप कॉल’ (Wake-up call) है। आर्थिक विकास की गति को बनाए रखने के लिए अब डेमोग्राफिक डिविडेंड (Demographic Dividend) को बचाना सरकारों की नई प्राथमिकता बन गया है।

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