परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन तेज: अनशन के 15वें दिन बिगड़ी सोनम वांगचुक की तबीयत, 7.8 किलो घटा वजन

विवेक ओझा/ नई दिल्ली: देश की प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे NEET, CUET और NET) में कथित पेपर लीक और व्यापक अनियमितताओं के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा प्रदर्शन अब एक गंभीर रूप ले चुका है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विभिन्न छात्र संगठनों के बैनर तले चल रहे इस विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे प्रख्यात शिक्षाविद् और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) का स्वास्थ्य अब तेजी से बिगड़ने लगा है। आज उनके आमरण अनशन का 15वां दिन है और मेडिकल बुलेटिन के अनुसार उनका वजन 7.8 किलोग्राम तक गिर चुका है।
क्या हैं छात्रों और वांगचुक की मांगें?
यह आंदोलन केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के पूरे ‘टेस्टिंग सिस्टम’ (Testing System) में आमूल-चूल बदलाव की मांग कर रहा है। सोनम वांगचुक और प्रदर्शनकारी छात्रों की तीन प्रमुख मांगें हैं:
1. एनटीए (NTA) द्वारा आयोजित सभी हालिया परीक्षाओं की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच हो।
2. पेपर लीक में शामिल शिक्षा माफियाओं के खिलाफ फास्ट-ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चले और उनकी संपत्तियां जब्त की जाएं।
3. शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए एक नई पारदर्शी नीति बनाई जाए जिसमें राज्य सरकारों की भागीदारी सुनिश्चित हो।
मेडिकल टीम की चेतावनी
जंतर-मंतर पर मौजूद डॉक्टरों की टीम ने चेतावनी दी है कि वांगचुक का ब्लड प्रेशर (BP) और शुगर लेवल खतरनाक स्तर तक नीचे आ गया है। डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी है, लेकिन वांगचुक ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर कोई लिखित आश्वासन नहीं देती, वे अपना अनशन नहीं तोड़ेंगे।
सरकार का रुख और आगे की राह
इस बीच, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है। सोनम वांगचुक की गिरती तबीयत ने सोशल मीडिया पर भी भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। हजारों युवा हर दिन जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं। यदि सरकार ने जल्द ही कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो यह छात्र आंदोलन एक बड़े देशव्यापी आक्रोश में बदल सकता है।



