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राम मंदिर ट्रस्ट का बड़ा फैसला: विवादों के बीच स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज बने नए अंतरिम महासचिव, पारदर्शिता की उम्मीदें बढ़ीं

राघवेंद्र प्रताप सिंह/ अयोध्या/नई दिल्ली: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के भीतर पिछले कुछ समय से चल रहे भारी प्रशासनिक और वित्तीय विवादों के बीच अब एक बड़ा और निर्णायक बदलाव सामने आया है। दान में कथित हेराफेरी के आरोपों के चलते चंपत राय के महासचिव पद से इस्तीफे के बाद, ट्रस्ट की आपातकालीन बैठक में एक सर्वसम्मत फैसला लिया गया है। वरिष्ठ और अत्यंत सम्मानित धार्मिक नेता स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज को ट्रस्ट का नया ‘अंतरिम महासचिव’ (Interim General Secretary) नियुक्त किया गया है। इस नियुक्ति को राम मंदिर के प्रबंधन में जनता का विश्वास फिर से बहाल करने की दिशा में एक बहुत महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कौन हैं स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज?

स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज का नाम देश के शीर्ष संतों और आध्यात्मिक गुरुओं में शुमार है। वे श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं और अब तक ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष (Treasurer) की अहम जिम्मेदारी निभा रहे थे। वेद, उपनिषद और भारतीय दर्शन के प्रकांड विद्वान होने के साथ-साथ उनका प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन का रिकॉर्ड बेहद बेदाग और पारदर्शी रहा है। उनके इसी साफ-सुथरे अक्स और सभी गुटों (संत समाज, वीएचपी और सरकार) के बीच उनकी स्वीकार्यता को देखते हुए उन्हें यह अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।

नई नियुक्ति से क्या होंगे बदलाव?

चंपत राय के कार्यकाल के अंतिम दिनों में दानपात्रों की सुरक्षा और रसीदों में कथित फर्जीवाड़े को लेकर जो उंगलियां उठी थीं, उसे शांत करना स्वामी गोविंद देव गिरी की सबसे पहली प्राथमिकता होगी। पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद एक संक्षिप्त बयान में उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान राम का खजाना आम जनता की खून-पसीने की कमाई है और इसके एक-एक पैसे का हिसाब पूरी तरह से पारदर्शी (Transparent) रखा जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, नए अंतरिम महासचिव के नेतृत्व में अब मंदिर परिसर के भीतर और बाहर के सभी वित्तीय लेन-देन को 100 प्रतिशत डिजिटल करने की योजना को फास्ट-ट्रैक किया जाएगा। इसके अलावा, दान प्रबंधन की देखरेख के लिए एक विशेष निगरानी समिति का गठन भी किया जा रहा है, जिसमें देश के जाने-माने चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CAs) और पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल किया जाएगा।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

इस नियुक्ति का संत समाज और विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी स्वागत किया है। जहां एक ओर विश्व हिंदू परिषद (VHP) और आरएसएस (RSS) ने इस फैसले को ट्रस्ट की आंतरिक मजबूती का प्रतीक बताया है, वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि चेहरा बदलने मात्र से काम नहीं चलेगा, बल्कि पुराने हिसाब-किताब का भी बारीकी से ऑडिट होना चाहिए। फिलहाल, स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज की नियुक्ति ने अयोध्या से लेकर दिल्ली तक के धार्मिक गलियारों में एक नई सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संचार किया है।

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