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कोलकाता की सड़क पर ममता बनर्जी की रैली में भिड़ गए TMC-BJP कार्यकर्ता, जमकर हुई धक्का-मुक्की, लगे ‘चोर-चोर’ के नारे

कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर खून-खराबा और भारी बवाल देखने को मिला है। राजधानी कोलकाता की सड़कों पर बुधवार को उस समय हाई-वोल्टेज ड्रामा शुरू हो गया, जब रैली निकाल रहे तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ता आपस में बुरी तरह भिड़ गए। दोनों ही दलों के समर्थकों के बीच जमकर लात-घूंसे, धक्का-मुक्की और तीखी नारेबाजी हुई। इस हिंसक टकराव के बाद पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है, लेकिन तनाव की स्थिति लगातार बनी हुई है। इस घटना ने एक बार फिर बंगाल की चरमराती कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

 

बालीगंज फाड़ी से हाजरा मोड़ के बीच रणक्षेत्र बनी सड़क

प्रत्यक्षदर्शियों और न्यूज एजेंसी एएनआई (ANI) द्वारा जारी ताजा फुटेज के मुताबिक, यह पूरा हंगामा कोलकाता के बालीगंज फाड़ी से हाजरा मोड़ के बीच हुआ। यहां टीएमसी की ओर से एक बड़े मार्च का आयोजन किया गया था, जिसका नेतृत्व खुद पार्टी की आलाकमान ममता बनर्जी कर रही थीं। रैली जैसे ही अपने तय रूट पर आगे बढ़ी, वहां पहले से मौजूद बीजेपी के समर्थक और कार्यकर्ता उनके सामने आ गए। देखते ही देखते दोनों तरफ के लोग एक-दूसरे से बुरी तरह उलझ पड़े और शांत सड़क अचानक रणक्षेत्र में तब्दील हो गई।

 

धक्का-मुक्की के बीच गूंजे ‘चोर-चोर’ के नारे, पुलिस के छूटे पसीने

शुरुआत में दोनों पक्षों के बीच केवल जुबानी जंग और तीखी बहस हो रही थी, लेकिन कुछ ही मिनटों में विवाद इतना बढ़ गया कि कार्यकर्ता मर्यादा भूलकर आपस में मारपीट करने लगे। दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को कॉलर पकड़कर खींचा और जमकर धक्का-मुक्की की। इसी बीच सड़क के बीचों-बीच दोनों तरफ से एक-दूसरे को निशाना बनाते हुए ‘चोर, चोर’ के गगनभेदी नारे लगाए जाने लगे। इस अचानक हुए हंगामे और नारेबाजी से राहगीरों में अफरा-तफरी मच गई और ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो गया। मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों और पुलिस के आला अधिकारियों को स्थिति संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।

हाईकोर्ट की हरी झंडी के बाद भी नहीं टला टकराव

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस मार्च को लेकर पहले से ही कानूनी पेंच फंसा हुआ था। कलकत्ता हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने एक दिन पहले ही इस रैली के समय और रूट में बदलाव करने के निर्देश देते हुए इसे सशर्त मंजूरी दी थी। इसके बावजूद रैली के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं दिखे। अब विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं कि आखिर अदालत के आदेश और रूट तय होने के बाद भी सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई और बीजेपी-टीएमसी के कार्यकर्ता एक ही जगह पर आमने-सामने कैसे आ गए?

 

कोलकाता बवाल से जुड़ीं 5 बड़ी बातें:

ममता बनर्जी का मार्च: यह विवादित और हाई-प्रोफाइल मार्च टीएमसी नेता ममता बनर्जी के नेतृत्व में निकाला जा रहा था।

विवाद का केंद्र: झड़प और धक्का-मुक्की की यह मुख्य घटना कोलकाता के बालीगंज फाड़ी से हाजरा मोड़ के बीच मुख्य सड़क पर हुई।

कार्यकर्ताओं में हिंसक झड़प: टीएमसी और बीजेपी के सैकड़ों समर्थक बीच सड़क पर सुरक्षा घेरा तोड़कर एक-दूसरे से भिड़ गए।

‘चोर-चोर’ की नारेबाजी: दोनों ही राजनीतिक पक्षों ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए जमकर अभद्र नारेबाजी की।

अदालती आदेश की धज्जियां: कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा रूट और समय बदलने के कड़े निर्देश के बावजूद इस टकराव को टाला नहीं जा सका।

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