ओडिशा मतदाता सूची विवाद: चुनाव आयोग ने विपक्ष के भारी गड़बड़ी के आरोपों को किया खारिज, कहा- ‘संशोधन के बाद विसंगतियां मामूली’

अभिषेक सिंह/ भुवनेश्वर/नई दिल्ली: आगामी चुनावों से पहले ओडिशा की राजनीति में मतदाता सूची (Electoral Rolls) को लेकर उठ रहे विवादों पर भारत के चुनाव आयोग (Election Commission of India – ECI) ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। राज्य के प्रमुख विपक्षी दलों द्वारा मतदाता सूची में ‘लाखों फर्जी वोटरों’ के शामिल होने और बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए, चुनाव आयोग ने कहा है कि हाल ही में चलाए गए विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) अभियान के बाद सूची में केवल बहुत ही मामूली विसंगतियां पाई गई हैं, जिन्हें दुरुस्त कर लिया गया है।
पिछले कुछ हफ्तों से ओडिशा के विपक्षी दलों ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए आरोप लगाया था कि सत्ताधारी दल के दबाव में लाखों मृत और विस्थापित लोगों के नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाए गए हैं। इसके जवाब में चुनाव आयोग ने राज्य के सभी 147 विधानसभा क्षेत्रों में एक महीने का सघन और स्वतंत्र डोर-टू-डोर (Door-to-door) सत्यापन अभियान चलाया था। इस अभियान में बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) ने जीपीएस (GPS) और डिजिटल ऐप्स का इस्तेमाल करते हुए घर-घर जाकर मतदाताओं की भौतिक पहचान की।
चुनाव आयोग द्वारा आज जारी की गई आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस ऑडिट में यह पाया गया कि विपक्षी दलों द्वारा दिए गए आंकड़े पूरी तरह से भ्रामक और अतिरंजित (Exaggerated) थे। आयोग ने माना कि प्रवासन (Migration) और मृत्यु के कारण कुछ नाम सूची में छूट गए थे, लेकिन यह दर सामान्य सांख्यिकीय त्रुटि (Statistical Margin of Error) के भीतर, यानी 0.5% से भी कम थी।
आयोग ने बताया कि इस अभियान के दौरान लगभग 2.5 लाख नए युवा मतदाताओं के नाम जोड़े गए हैं और 40 हज़ार से अधिक अमान्य या डुप्लीकेट नामों को सिस्टम से स्थायी रूप से डिलीट कर दिया गया है। चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुचिता पर बिना किसी ठोस सबूत के सवाल न उठाएं। इस स्पष्टीकरण के बाद राज्य का प्रशासन अब निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद हो गया है।



