भारत और इंडोनेशिया मिलकर इंडो-पैसिफिक और ग्लोबल साउथ को देंगे नई दिशा : पीएम मोदी

नई दिल्ली (राघवेंद्र प्रताप सिंह) : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को इंडोनेशिया की संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए भारत और इंडोनेशिया के संबंधों को साझा सभ्यता, लोकतांत्रिक मूल्यों और भविष्य की साझेदारी पर आधारित बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच केवल राजनयिक संबंध नहीं, बल्कि हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और समुद्री विरासत का अटूट रिश्ता है। प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने के लिए ‘गंगा-महाकाम विजन’ पेश किया और कहा कि भारत तथा इंडोनेशिया मिलकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र, ग्लोबल साउथ और पूरी मानवता के लिए नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।
इंडोनेशिया के स्वागत और सर्वोच्च सम्मान पर जताया आभार
प्रधानमंत्री ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, उपराष्ट्रपति, संसद अध्यक्ष और सांसदों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इंडोनेशिया की जनता ने जिस आत्मीयता से उनका स्वागत किया, वह उनके जीवन के सबसे यादगार पलों में शामिल रहेगा। उन्होंने कहा कि उन्हें मिला इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान 140 करोड़ भारतीयों के प्रति वहां की जनता के स्नेह का प्रतीक है। यह सम्मान दोनों देशों के लोकतांत्रिक मूल्यों, साझा विरासत और मजबूत होते संबंधों को समर्पित है।
भारत-इंडोनेशिया संबंधों की ऐतिहासिक विरासत का किया उल्लेख
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया केवल समुद्र ही साझा नहीं करते, बल्कि दोनों देशों का संबंध रामायण, महाभारत, नालंदा, गरुड़, बोरोबुदुर, प्रम्बानन, वायांग कला, समुद्री व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसी हजारों वर्षों पुरानी विरासत से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि गुजरात और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं तथा राष्ट्रपति सुकर्णो ने भी दोनों देशों को रक्त और संस्कृति के रिश्ते से जुड़ा बताया था।
लोकतंत्र और विकास को बताया साझा ताकत
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और ‘मदर ऑफ डेमोक्रेसी’ है, जबकि इंडोनेशिया दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा लोकतंत्र है। दोनों देशों ने विविधता को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र अवसर देता है, विश्वास पैदा करता है और भविष्य का निर्माण करता है। भारत और इंडोनेशिया का लोकतांत्रिक अनुभव पूरी दुनिया के लिए प्रेरणास्रोत है।
2045 और 2047 के विजन को बताया पूरक
पीएम मोदी ने कहा कि इंडोनेशिया का ‘एमास 2045’ विजन और भारत का ‘विकसित भारत 2047’ संकल्प एक-दूसरे के पूरक हैं। दोनों देश दुनिया की युवा आबादी, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, समुद्री शक्ति और ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज होने के कारण भविष्य में स्वाभाविक साझेदार बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 25 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है और सहयोग की संभावनाएं अभी और व्यापक हैं।
स्पेस, समुद्री क्षेत्र और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया स्पेस टेक्नोलॉजी, सैटेलाइट, ब्लू इकोनॉमी, समुद्री सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल क्षेत्रों में मिलकर नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत इंडोनेशिया में सैटेलाइट लॉन्च सुविधा विकसित करने में सहयोग देने के लिए भी तैयार है। इसके अलावा आतंकवाद, साइबर सुरक्षा, खुफिया सहयोग और डी-रेडिकलाइजेशन जैसे क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत करने पर भी बल दिया।
यूएन सुधार, इंडो-पैसिफिक और ब्रिक्स पर साझा दृष्टिकोण
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को अब और टाला नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि भारत स्वतंत्र, मुक्त और समावेशी इंडो-पैसिफिक का समर्थक है तथा आसियान की केंद्रीय भूमिका का समर्थन करता है। उन्होंने ब्रिक्स में इंडोनेशिया की सदस्यता का स्वागत करते हुए कहा कि भारत की अध्यक्षता में दोनों देश मिलकर ग्लोबल साउथ की आवाज को और मजबूत बनाएंगे।
‘गंगा-महाकाम विजन’ का किया प्रस्तुतीकरण
प्रधानमंत्री ने भारत-इंडोनेशिया साझेदारी के लिए ‘गंगा-महाकाम विजन’ प्रस्तुत किया। इसके पांच प्रमुख स्तंभ हैं—सभ्यतागत जुड़ाव, साझा विकास, सुरक्षा एवं रणनीतिक विश्वास, समुद्री समृद्धि और ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज। उन्होंने कहा कि यह विजन दोनों देशों की साझेदारी को भविष्य की पीढ़ियों के लिए शांति, समृद्धि, सुरक्षा और साझा विकास का आधार बनाएगा।
जन-जन के रिश्ते मजबूत करने का आह्वान
पीएम नरेंद्र मोदी ने तुलसीदास की चौपाई और इंडोनेशिया की प्रसिद्ध कहावत ‘ताक केनाल माका ताक सायांग’ का उल्लेख करते हुए कहा कि जब तक लोग एक-दूसरे को जानेंगे नहीं, तब तक अपनापन नहीं बढ़ेगा। उन्होंने दोनों देशों के बीच लोगों के आपसी संपर्क, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने इंडोनेशिया के सांसदों को भारत आने का विशेष निमंत्रण भी दिया और कहा कि दोनों देश ‘पार्टनर्स फॉरएवर’ बनकर साझा समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ेंगे।



