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दक्षिण चीन सागर में बढ़ा टकराव: फिलीपींस ने चीनी ‘नौसैनिक गुंडागर्दी’ के खिलाफ दर्ज कराया कूटनीतिक विरोध, अमेरिका के साथ साझा गश्त का दायरा बढ़ाया

विवेक ओझा/ मनीला/नई दिल्ली | ग्लोबल ट्रेड के सबसे व्यस्त और रणनीतिक जलमार्ग ‘दक्षिण चीन सागर’ (South China Sea) में युद्ध के बादल एक बार फिर गहरे होने लगे हैं। चीन की विस्तारवादी नीतियों और समुद्र में लगातार बढ़ती दादागिरी के खिलाफ फिलीपींस ने अब बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। मनीला (फिलीपींस की राजधानी) ने हालिया दिनों में चीनी कोस्ट गार्ड और नौसैनिक जहाजों द्वारा की गई ‘गुंडागर्दी’ और अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के उल्लंघन के खिलाफ बीजिंग के समक्ष एक और आधिकारिक कूटनीतिक विरोध (Formal Diplomatic Protest) दर्ज कराया है।

केवल कागजी विरोध तक सीमित न रहते हुए, फिलीपींस ने ड्रैगन को घेरने के लिए एक बड़ा सैन्य कदम भी उठाया है। फिलीपींस के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि विवादित जलक्षेत्र में अमेरिकी नौसेना (US Navy) के साथ जारी उनकी साझा गश्त (Joint Patrol) के भौगोलिक दायरे और सैन्य शक्ति को तत्काल प्रभाव से बढ़ा दिया गया है।

ताजा विवाद की वजह: क्या थी चीन की ‘नौसैनिक गुंडागर्दी’?

फिलीपींस के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक, यह कूटनीतिक विरोध ‘सेकंड थॉमस शोल’ (Second Thomas Shoal) और ‘सबीना शोल’ के पास हुई कई खतरनाक घटनाओं के बाद दर्ज कराया गया है।

  • जहाजों को जानबूझकर टक्कर मारना: चीनी कोस्ट गार्ड के बड़े जहाजों ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में नियमित गश्त कर रहे फिलीपींस के असैन्य आपूर्ति जहाजों को जानबूझकर टक्कर मारी और उनका रास्ता रोका।
  • मिलिट्री-ग्रेड लेजर और वॉटर कैनन का इस्तेमाल: चीनी नौसेना ने फिलीपीन के नाविकों को अंधा करने के लिए खतरनाक ‘मिलिट्री-ग्रेड लेजर’ लाइट का प्रयोग किया और उन पर भारी दबाव वाली वॉटर कैनन (पानी की तोपों) से हमला किया, जिससे कई नाविक घायल हो गए।
  • समुद्री डाकुओं जैसा व्यवहार: फिलीपींस सरकार ने आरोप लगाया कि चीनी सैनिकों का व्यवहार किसी पेशेवर नौसेना जैसा नहीं, बल्कि ‘समुद्री डाकुओं’ जैसा था, जो डरा-धमकाकर पूरे वैश्विक व्यापार मार्ग को बंधक बनाना चाहते हैं।

अमेरिका-फिलीपींस का ‘कवच’: साझा गश्त का बढ़ा दायरा

चीन के इस हिंसक रुख का जवाब देने के लिए अमेरिका और फिलीपींस ने अपनी *’साझा रक्षा संधि’ (Mutual Defense Treaty)* को पूरी तरह से एक्टिव कर दिया है। दोनों देशों की नौसेनाओं ने दक्षिण चीन सागर में अपने ‘संयुक्त समुद्री अभियान’ (Joint Maritime Enterprise) के तहत नया एक्शन प्लान लागू किया है:

  • विस्तारित रक्षा घेरा: अब दोनों देशों के युद्धपोत केवल फिलीपींस की समुद्री सीमा के पास ही नहीं, बल्कि चीन द्वारा दावा किए जाने वाले ‘एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन’ (EEZ) के विवादित हिस्सों के भीतर तक जाकर साझा गश्त करेंगे।
  • पनडुब्बी रोधी और एआई निगरानी: इस गश्त में पहली बार अमेरिका की परमाणु-संचालित पनडुब्बियों और एडवांस्ड एआई-ड्रिवेन सर्विलांस ड्रोनों (AI Surveillance Drones) को शामिल किया जा रहा है, जो चीनी नौसेना की हर हरकत पर रीयल-टाइम नजर रखेंगे।

बीजिंग की बौखलाहट: “आग से न खेले मनीला”

फिलीपींस और अमेरिका के इस चक्रव्यूह से चीन पूरी तरह बौखला गया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बीजिंग में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “फिलीपींस बाहरी ताकतों (अमेरिका) के दम पर चीन की संप्रभुता को चुनौती देने की कोशिश कर रहा है। दक्षिण चीन सागर पर चीन का ऐतिहासिक अधिकार है और यदि मनीला ने आग से खेलना बंद नहीं किया, तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।”

इंडो-पैसिफिक’ में शक्ति संतुलन का इम्तिहान*

यदि इस पूरे घटनाक्रम को वैश्विक राजनीति के चश्मे से देखा जाए, तो दक्षिण चीन सागर अब दुनिया का सबसे संवेदनशील ‘फ्लैशपॉइंट’ (Flashpoint) बन चुका है। चीन इस पूरे समुद्र को अपना ‘प्राइवेट स्विमिंग पूल’ समझता है, जहां से सालाना 3 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का वैश्विक व्यापार गुजरता है।

> फिलीपींस जैसे छोटे देश का चीन के सामने डटकर खड़े होना और अमेरिका के साथ साझा गश्त का दायरा बढ़ाना यह साफ करता है कि अब ‘इंडो-पैसिफिक’ देश बीजिंग की धौंस सहने के मूड में नहीं हैं। अमेरिका के लिए भी यह साख की लड़ाई है; अगर वह यहाँ फिलीपींस का साथ छोड़ता है, तो ताइवान और जापान जैसे सहयोगियों का उस पर से भरोसा उठ जाएगा। 2026 का यह साल यह तय करेगा कि क्या अंतरराष्ट्रीय कानून (UNCLOS) की ताकत ड्रैगन की सैन्य ताकत को पीछे धकेल पाती है या नहीं।

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