कोलकाता में ममता बनर्जी का धरना
विपक्षी एकजुटता के दावों के बीच अपनों ने ही फेरा मुंह? प्रदर्शन में पहुंचे महज 8 विधायक और 6 सांसद

पश्चिम बंगाल की राजनीति से आज एक ऐसी चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है जिसने राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है। अपनी आक्रामक शैली, जमीनी पकड़ और बड़े जन आंदोलनों के लिए मशहूर तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने आज कोलकाता के केंद्र में एक बड़ा धरना प्रदर्शन किया। केंद्र सरकार की नीतियों और राज्य के प्रति कथित सौतेले व्यवहार के खिलाफ आयोजित इस धरने ने उस समय सबका ध्यान अपनी ओर खींचा, जब प्रदर्शन स्थल पर पार्टी के कद्दावर नेताओं की भारी कमी देखी गई। इस हाई-प्रोफाइल धरने में मुख्यमंत्री के साथ एकजुटता दिखाने के लिए पूरी पार्टी में से केवल 8 विधायक (MLAs) और महज 6 सांसद (MPs) ही मौके पर पहुंचे।
मुख्यमंत्री स्तर के इस बड़े आंदोलन में इतनी कम उपस्थिति ने तुरंत ही राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। इसे तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही गहरी आंतरिक कलह (Internal Rift) और ममता बनर्जी के एकछत्र नेतृत्व पर उठते सवालों के सीधे संकेत के रूप में देखा जा रहा है। आमतौर पर ममता बनर्जी के किसी भी आह्वान या धरने में पार्टी के तमाम छोटे-बड़े जनप्रतिधिनियों, मंत्रियों और हजारों कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ पड़ता है। ऐसे में केवल 14 जनप्रतिनिधियों का मंच पर दिखना यह साफ करता है कि टीएमसी के अंदरूनी हालात इस समय सामान्य नहीं हैं।
पिछले कुछ महीनों से पार्टी के भीतर ‘ओल्ड गार्ड’ यानी पुराने वफादार नेताओं और ‘न्यू जनरेशन’ यानी युवा नेतृत्व के बीच अधिकारों की लड़ाई और वैचारिक खींचतान की खबरें लगातार आ रही थीं। आज के इस अहम धरने से पार्टी के कई दिग्गज चेहरों और सांसदों की दूरी को राजनीतिक विश्लेषक मुख्यमंत्री के नेतृत्व के प्रति एक मौन असंतोष या आंतरिक बगावत के रूप में देख रहे हैं। इस घटना ने साबित किया है कि सांगठनिक स्तर पर पार्टी के भीतर गुटबाजी चरम पर पहुंच चुकी है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पश्चिम बंगाल में विपक्षी दलों, विशेषकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और वामदलों को ममता बनर्जी सरकार और उनकी पार्टी पर हमला करने का एक बड़ा बैठे-बिठाए मुद्दा मिल गया है। विरोधियों का तर्क है कि जो मुख्यमंत्री खुद को राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष का सबसे बड़ा चेहरा और एकजुट करने वाली धुरी बताती हैं, आज उनकी अपनी ही पार्टी के सहयोगियों का उन पर से भरोसा उठ गया है। सांगठनिक कमजोरी को उजागर करने वाले इस धरने के बाद अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि अपनी ही पार्टी के भीतर पनप रहे इस असंतोष को दबाने और डैमेज कंट्रोल करने के लिए ममता बनर्जी आने वाले दिनों में क्या कड़े कदम उठाती हैं।



