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खेती बचाओ अभियान बनेगा जनआंदोलन, 01 जून से रायसेन से होगी राष्ट्रीय शुरुआत: शिवराज सिंह चौहान

नई दिल्ली : केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ‘खेती बचाओ अभियान’ केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि मातृभूमि और कृषि भूमि की रक्षा के लिए एक राष्ट्रीय जनआंदोलन बनेगा। यह अभियान 01 जून से मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के रामसिया गांव से शुरू होगा।

 

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, अभियान की पूर्व तैयारी के तहत रविवार को शिवराज सिंह चौहान ने देशभर के कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विभागों के अधिकारियों के साथ वर्चुअल संवाद किया। इस दौरान उन्होंने अभियान को जनभागीदारी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

 

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह कार्यक्रम परंपरागत गतिविधि नहीं है, बल्कि कृषि भूमि की रक्षा और भविष्य की पीढ़ियों के अधिकार सुरक्षित करने का राष्ट्रीय संकल्प है। बढ़ता तापमान, असंतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य में गिरावट और जलवायु संकट कृषि के लिए गंभीर चुनौती बन चुके हैं।

 

उन्होंने कहा कि अभियान के तहत संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा परीक्षण, सॉयल हेल्थ कार्ड, प्राकृतिक खेती, फसल चयन, जल संरक्षण, हरी खाद और कम वर्षा की स्थिति में वैकल्पिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही नकली खाद, बीज और कीटनाशकों की पहचान पर भी विशेष फोकस रहेगा।

 

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसानों में विश्वास केवल सलाह से नहीं बल्कि खेतों में जाकर वैज्ञानिक प्रमाण और प्रदर्शन के माध्यम से बढ़ाया जा सकता है। अभियान के लिए 30 जून तक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए, जिसमें गांव स्तर तक कार्यक्रमों की स्पष्ट रूपरेखा हो।

 

उन्होंने कहा कि उन्होंने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से फोन पर बातचीत कर इस अभियान में सहभागिता का आग्रह किया है। साथ ही, केंद्रीय मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों से भी इसमें जुड़ने की अपील की गई है।

 

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह अभियान ‘वोकल फॉर लोकल’ और आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। वह स्वयं भी विभिन्न राज्यों के गांवों का दौरा कर किसानों से सीधे संवाद करेंगे।

 

इस वर्चुअल बैठक में कृषि मंत्रालय के सचिव, आईसीएआर महानिदेशक सहित देशभर के कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति, वैज्ञानिक और कृषि विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

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