वियतनाम के राष्ट्रपति का भारत दौरा: तो लाम (To Lam) पहुंचे मुंबई, रक्षा और व्यापारिक रिश्तों को मिलेगी नई उड़ान

मुंबई (डिप्लोमेटिक डेस्क): भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ (Act East) नीति और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी कूटनीतिक पकड़ को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम (To Lam) अपने तीन दिवसीय महत्वपूर्ण राजकीय दौरे पर आज भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई पहुंच गए हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचने पर महाराष्ट्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और विदेश मंत्रालय के कूटनीतिज्ञों ने उनका भव्य और गर्मजोशी से स्वागत किया। राष्ट्रपति तो लाम का यह दौरा भारत और वियतनाम के बीच ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ (Comprehensive Strategic Partnership) को एक नई और मजबूत दिशा देने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
मुंबई में व्यापार और निवेश पर खास फोकस
राष्ट्रपति तो लाम ने अपने भारत दौरे की शुरुआत नई दिल्ली के बजाय मुंबई से की है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि वियतनाम भारत के साथ अपने आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। आज मुंबई में वे भारत के शीर्ष उद्योगपतियों, सीईओ (CEOs) और निवेशकों के साथ एक उच्च स्तरीय बिजनेस फोरम की बैठक में हिस्सा लेंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाना है। वियतनाम विशेष रूप से भारत से सूचना प्रौद्योगिकी (IT), फार्मास्युटिकल्स, नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) और कृषि तकनीक के क्षेत्र में बड़े निवेश की उम्मीद कर रहा है। वहीं, भारतीय कंपनियों के लिए भी वियतनाम एक तेजी से उभरता हुआ और आकर्षक मैन्युफैक्चरिंग हब बन चुका है।
दक्षिण चीन सागर और सामरिक सुरक्षा पर नजरें
वियतनाम, दक्षिण पूर्व एशिया (ASEAN) में भारत का एक बेहद अहम और भरोसेमंद रणनीतिक साझीदार है। चीन की लगातार बढ़ती आक्रामकता और दक्षिण चीन सागर (South China Sea) में बढ़ते तनाव के बीच तो लाम का यह दौरा सामरिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा (Maritime Security), रक्षा उपकरणों की आपूर्ति और संयुक्त सैन्य अभ्यास को लेकर कई अहम समझौतों पर मुहर लग सकती है। भारत पहले ही वियतनाम को ब्रह्मोस मिसाइल (BrahMos Missile) और तेजस फाइटर जेट्स की पेशकश कर चुका है, जिस पर आगे की बातचीत इस दौरे में होने की प्रबल संभावना है।
सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को मिलेगी मजबूती
भारत और वियतनाम के बीच केवल व्यापारिक या सामरिक ही नहीं, बल्कि हजारों साल पुराने गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध भी हैं। बौद्ध धर्म दोनों देशों को एक मजबूत वैचारिक सूत्र में बांधता है। अपने इस दौरे के दौरान राष्ट्रपति तो लाम मुंबई में वियतनामी समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगे और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के नए कार्यक्रमों पर चर्चा करेंगे। दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों की संख्या बढ़ने से पर्यटन क्षेत्र (Tourism Sector) में भी भारी उछाल देखने को मिल रहा है।
राष्ट्रपति तो लाम का यह भारत दौरा इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि एशिया की भू-राजनीति (Geopolitics) में भारत और वियतनाम एक-दूसरे को स्वाभाविक सहयोगी मानते हैं। मुंबई में व्यापारिक नीतियां तय करने के बाद वे नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय वार्ता होगी। यह दौरा निश्चित रूप से दोनों देशों की दोस्ती के इतिहास में एक नया और स्वर्णिम अध्याय लिखेगा।



