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कबीला के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों के समर्थन में कांगो की राजधानी में हजारों लोगों का मार्च 

अफ्रीकी देश कांगो की राजधानी किंशासा में हजारों सरकार समर्थकों ने जोसेफ कबीला के खिलाफ संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के समर्थन में सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया है। अमेरिका ने पिछले सप्ताह पूर्व राष्ट्रपति को ब्लैकलिस्ट कर दिया था। उन पर देश के पूर्वी हिस्से में संघर्षरत रवांडा समर्थित M23 विद्रोहियों और उनकी राजनीतिक-सैन्य शाखा, कांगो रिवर एलायंस (AFC) का समर्थन करने का आरोप लगाया गया है।

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने दावा किया कि कबीला ने किंशासा सरकार को अस्थिर करने के इरादे से इन समूहों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान की है। इस क्षेत्र में जारी हिंसक संघर्ष के कारण हजारों नागरिकों की जान जा चुकी है और बड़े पैमाने पर विस्थापन का संकट पैदा हो गया है।

वहीं कई कबीला विरोधी लोगों का कहना है कि अमेरिका ने सही किया। आलोचकों का कहना है कि कबीला ने कई नरसंहार किए हैं, और वह फतशी (राष्ट्रपति शिट्सेकेडी का उपनाम) को शांति से काम नहीं करने दे रहे हैं। अब कबीला को गिरफ्तार करें ताकि वह हमें चैन से रहने दें, हमें उनसे अब और कुछ लेना-देना नहीं है।”
उरागन मवांजा (UDPS पार्टी के कार्यकर्ता) ने अमरीकी प्रतिबंधों को “हत्यारों और अपराधियों” के खिलाफ एक “महत्वपूर्ण कदम” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों ने अपने निजी पारिवारिक व्यवसायों के लिए सरकारी कंपनियों को नष्ट कर देश को बर्बाद कर दिया है।

पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति :

पिछले साल, कांगो की एक सैन्य अदालत ने कबीला को M23/AFC गठबंधन के साथ “मिलीभगत” और देशद्रोह के लिए उनकी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई थी। किंशासा सरकार ने इन प्रतिबंधों का स्वागत करते हुए इसे “दोषमुक्ति के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम” बताया था। दूसरी ओर, कबीला ने इन आरोपों को “पूरी तरह से अनुचित, राजनीति से प्रेरित और निराधार” करार दिया है।
गौरतलब है कि खनिज संसाधनों से समृद्ध पूर्वी कांगो में लड़ाई अब भी जारी है, जबकि पिछले साल के अंत में सरकार और M23 के बीच एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।

अमेरिकी हस्तक्षेप: वाशिंगटन ने इस विफल समझौते को लागू करने के प्रयास में पड़ोसी देश रवांडा पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बड़े धूमधाम से जिस शांति समझौते की घोषणा की थी, उसमें अमेरिकी उद्योगों के लिए क्षेत्र की खनिज संपदा तक विशेष पहुंच प्राप्त करने का प्रावधान शामिल है।

मानवीय संकट: जनवरी 2025 में रणनीतिक शहर गोमा पर कब्जा करने के साथ ही, रवांडा समर्थित विद्रोहियों ने हाल के वर्षों में पूर्वी डीआरसी के बड़े हिस्सों पर नियंत्रण कर लिया है। इस तेज होती लड़ाई में हजारों नागरिक मारे गए हैं और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं, जिससे एक बड़ा मानवीय संकट पैदा हो गया है।

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