अजित डोभाल ने वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम से की मुलाकात

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (National Security Advisor, NSA) अजित डोभाल ने वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम से मुलाकात की है। उन्होंने दोनों देशों के बीच बहुआयामी और व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया । राष्ट्रपति तो लाम भारत की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे थे। तो लाम जो वियतनाम की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के महासचिव भी हैं, सात मई तक भारत में रहेंगे। पिछले महीने वियतनाम के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद यह उनकी भारत की पहली यात्रा है। उल्लेखनीय है कि भारत और वियतनाम के संबंध ऐतिहासिक रूप से मजबूत हैं और वर्तमान में ये ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी'(Comprehensive Strategic Partnership) के रूप में प्रगाढ़ हुए हैं। दोनों देश रक्षा (समुद्री सुरक्षा), आर्थिक (व्यापार व निवेश), और सांस्कृतिक सहयोग के माध्यम से अटूट दोस्ती साझा करते हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ पॉलिसी में वियतनाम एक प्रमुख भागीदार है। दक्षिण चीन सागर में तनाव बना हुआ है और ग्लोबल कंपनियां चीन से दूर मैन्युफैक्चरिंग कर रही हैं, ऐसे में नई दिल्ली और हनोई एक-दूसरे को समुद्री सुरक्षा और आर्थिक मजबूती के लिए भरोसेमंद साझेदार मानते हैं। वियतनाम दक्षिण चीन सागर के विवाद में सबसे ज्यादा सीधे तौर पर प्रभावित होने वाले देशों में से एक है, जो समुद्री दावों, ऊर्जा के नए स्रोतों की खोज और नौपरिवहन की स्वतंत्रता को लेकर चीन के लगातार दबाव का सामना कर रहा है. भारत, हालांकि दावेदार देश नहीं है, लेकिन उसने हमेशा नौपरिवहन और विशिष्ट हवाई क्षेत्र से गुजरने (Overflight) की आजादी, संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) का सम्मान करने, और बिना दबाव के विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन किया है।
चीन के आपत्ति के बावजूद, भारत की ONGC कंपनी दक्षिण चीन सागर में वियतनामी ब्लॉक में तेल की खोज में लंबे समय से शामिल है. इस मामले में, राष्ट्रपति लाम का दौरा नई दिल्ली और हनोई के बीच नियमों पर आधारित व्यवस्था के पक्ष में एक शांत लेकिन मजबूत समुद्री समन्वय को मजबूत करता है.
वियतनाम भारत को एक भरोसेमंद, गैर-हस्तक्षेपकारी सुरक्षा भागीदार मानता है, जिस पर बड़ी ताकतों के बीच दुश्मनी की भू-राजनीतिक अड़चनें नहीं है. वहीं, भारत वियतनाम को एक अहम समुद्री भागीदार मानता है जो दक्षिण-पूर्व एशिया में उसकी रणनीतिक मौजूदगी को मजबूत करता है।
दोनों देशों के बीच 2000 वर्षों से अधिक पुराने सभ्यतागत संबंध हैं, जिसमें बौद्ध धर्म की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वियतनाम में चम्पा राज्य पर भारतीय संस्कृति का गहरा प्रभाव रहा है। दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध बेहद मजबूत हैं। भारत, वियतनाम को समुद्री सुरक्षा और क्षमता निर्माण में सहायता करता है, जिसमें गश्ती नौकाओं की आपूर्ति और प्रशिक्षण शामिल है।
आर्थिक और व्यापारिक साझेदारी की बात करें तो 2026 की पहली तिमाही में ही द्विपक्षीय व्यापार 4.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो तेज वृद्धि को दर्शाता है। वियतनाम भारत के शीर्ष 10 व्यापारिक भागीदारों में से एक है। 2016 में दोनों देशों के संबंधों को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ में उन्नत किया गया। दोनों देश दक्षिण चीन सागर में नेविगेशन की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एकसमान विचार रखते हैं।



