Trending

पंचायत उन्नति सूचकांक (पीएआई) 2.0 की रिपोर्ट जारी: 3635 पंचायतें अग्रणी श्रेणी के रूप में उभरीं

पंचायती राज मंत्रालय ने जमीनी स्तर पर शासन को मजबूत करने और समावेशी ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 24 अप्रैल 2026 को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए पंचायत उन्नति सूचकांक (पीएआई) 2.0 रिपोर्ट जारी की। प्रत्येक पंचायत के लिए एक रिपोर्ट कार्ड के रूप में कार्य करने वाली यह रिपोर्ट बताती है कि (समग्र अंकों के आधार पर) 3,635 ग्राम पंचायतें अग्रणी श्रेणी में आती हैं, जबकि 1,18,824 ग्राम पंचायतें (भाग लेने वाली ग्राम पंचायतों/पारंपरिक स्थानीय निकायों का लगभग 45.72 प्रतिशत) उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली श्रेणी में हैं। जिन क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, उनमें गरीबी मुक्त विकास और पंचायत में आजीविका में सुधार तथा स्वस्थ पंचायत शामिल हैं। विषय 1: पंचायतों में गरीबी मुक्त और बेहतर आजीविका के अंतर्गत देशभर में कुल 3,313 ग्राम पंचायतों (जीपी)/पारंपरिक स्थानीय निकायों (टीएलबी) ने ए+ ग्रेड प्राप्त किया है, जो पंचायत स्तर पर गरीबी उन्मूलन और आजीविका सृजन में उनके महत्वपूर्ण प्रदर्शन को दर्शाता है। इसी प्रकार विषय 2: स्वस्थ पंचायतों के अंतर्गत कुल 1,015 ग्राम पंचायतों/टीएलबी ने ए+ ग्रेड प्राप्त किया है, जो निवारक स्वास्थ्य देखभाल, पोषण जागरूकता, स्वच्छता प्रथाओं और सामुदायिक सहभागिता में मजबूत परिणाम प्रदर्शित करता है।

पीएआई 2.0 ने 97.30 प्रतिशत की असाधारण राष्ट्रीय भागीदारी दर्ज की है, जिसमें 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 2,59,867 ग्राम पंचायतों ने मान्य डेटा प्रस्तुत किया है। यह पीएआई संस्करण 1.0 के तहत हासिल की गई 80.79 प्रतिशत भागीदारी की तुलना में एक उल्लेखनीय और सराहनीय सुधार है। इस संस्करण में किए गए प्रमुख सुधारों में एक एकीकृत डेटा प्रविष्टि प्रपत्र, पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए ग्राम सभा द्वारा अनिवार्य सत्यापन, नोडल केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के राष्ट्रीय पोर्टलों से डेटा का बेहतर ऑटो-पोर्टिंग, डेटा की सटीकता में सुधार के लिए सॉफ्ट और क्रॉस-डेटा सत्यापन तंत्र, सहज नेविगेशन के लिए रीयल-टाइम डैशबोर्ड और स्थानीय भाषा समर्थन शामिल हैं। पीएआई 2.0 (वित्तीय वर्ष 2023-24) का प्रकाशन पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत करने और सहभागी, पारदर्शी और डेटा-आधारित स्थानीय शासन के माध्यम से “विकसित ग्राम पंचायतों” की परिकल्पना को आगे बढ़ाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है।

पीएआई 2.0 के बारे में :

पंचायत उन्नति सूचकांक साक्ष्य-आधारित योजना, प्रदर्शन निगरानी और पंचायती राज संस्थाओं को प्रोत्साहन देने के लिए एक सशक्त उपकरण के रूप में कार्य करता है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा विकासात्मक हस्तक्षेपों को प्राथमिकता देने, ग्राम पंचायत विकास योजनाओं की तैयारी में सहायता करने और उच्च प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को शिक्षण केंद्रों और सर्वोत्तम प्रथाओं के मॉडल के रूप में पहचानने के लिए इसे तेजी से अपनाया जा रहा है। ग्राम पंचायत प्रदर्शन का आकलन करने के लिए भारत का पहला राष्ट्रव्यापी डेटा-संचालित ढांचा, पीएआई 2.0, देशभर में 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों में से प्रत्येक का मूल्यांकन 150 संकेतकों और 230 डेटा बिंदुओं के आधार पर करता है, जो सतत विकास लक्ष्यों (एलएसडीजी) के स्थानीयकरण के अंतर्गत नौ विषयगत क्षेत्रों को कवर करते हैं – गरीबी, स्वास्थ्य, बाल कल्याण, जल, पर्यावरण, अवसंरचना, सामाजिक न्याय, सुशासन और महिला सशक्तिकरण। अपने पूर्ववर्ती संस्करण की तुलना में अधिक परिष्कृत और सुदृढ़ पीएआई 2.0 ने पीएआई संस्करण 1.0 के 516 संकेतकों और 794 डेटा बिंदुओं से संकेतक ढांचे को सुव्यवस्थित करते हुए इसे 150 संकेतकों और 230 डेटा बिंदुओं तक सीमित कर दिया है, जिससे अधिक स्पष्ट दृष्टिकोण, बेहतर उपयोगिता और राष्ट्रीय नियोजन ढांचों के साथ मजबूत जुड़ाव सुनिश्चित होता है। ग्राम पंचायतों को उनके समग्र पीएआई स्कोर के आधार पर पांच प्रदर्शन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है – अचीवर (ए+: 90 और उससे अधिक), फ्रंट रनर (ए: 75 से 90 से कम), परफॉर्मर (बी: 60 से 75 से कम), एस्पिरेंट (सी: 40 से 60 से कम), और बिगिनर (डी: 40 से कम) – जिससे सार्थक बेंचमार्किंग, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और जमीनी स्तर पर लक्षित हस्तक्षेप संभव हो पाते हैं।

Related Articles

Back to top button