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तेलंगाना की सियासत में बड़ा भूचाल

पिता KCR से बगावत के बाद के. कविता ने लॉन्च की अपनी नई पार्टी 'TRS'

हैदराबाद: तेलंगाना की राजनीति में शनिवार को एक ऐसा ऐतिहासिक और चौंकाने वाला घटनाक्रम देखने को मिला, जिसने राज्य के सियासी समीकरणों में हलचल पैदा कर दी है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (KCR) की बेटी और पूर्व सांसद के. कविता ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी का आधिकारिक तौर पर ऐलान कर दिया है। पिता द्वारा अपनी ही पार्टी, भारत राष्ट्र समिति (BRS), से निलंबित किए जाने के कुछ महीनों बाद, कविता ने अब अपनी खुद की राजनीतिक जमीन तैयार करते हुए ‘तेलंगाना राष्ट्र सेना’ (Telangana Rashtra Sena – TRS) को लॉन्च कर दिया है।

पारिवारिक कलह से राजनीतिक बगावत तक
यह बड़ा राजनीतिक कदम ऐसे समय में सामने आया है, जब हाल ही में के. कविता को उनके पिता और BRS प्रमुख केसीआर ने ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ (anti-party activities) का हवाला देते हुए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। एक समय था जब के. कविता को पार्टी के सबसे अहम चेहरों में गिना जाता था। तेलंगाना आंदोलन के दौरान उनके द्वारा किए गए कार्यों की काफी सराहना होती थी। लेकिन पिता और बेटी के बीच उपजे इस गहरे राजनीतिक मतभेद ने आखिरकार उन्हें एक अलग राजनीतिक राह चुनने पर मजबूर कर दिया।

पुराने ‘TRS’ ब्रांड की वापसी
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस नई राजनीतिक पार्टी के गठन की प्राथमिक घोषणा इस साल मार्च के महीने में ही कर दी गई थी, लेकिन इसकी औपचारिक और भव्य शुरुआत अब की गई है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प पहलू कविता की नई पार्टी का नाम है— ‘तेलंगाना राष्ट्र सेना’ (TRS)। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नाम जानबूझकर चुना गया है। दरअसल, केसीआर ने राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखने के लिए अपनी मूल पार्टी ‘तेलंगाना राष्ट्र समिति’ (TRS) का नाम बदलकर ‘भारत राष्ट्र समिति’ (BRS) कर दिया था। कविता ने बड़ी ही चतुराई से उसी पुराने संक्षिप्त नाम ‘TRS’ को अपनी नई पार्टी के लिए अपना लिया है। इसके जरिए वह उन जमीनी कार्यकर्ताओं और मतदाताओं को अपने पाले में खींचने की कोशिश कर रही हैं, जो आज भी मूल ‘TRS’ और क्षेत्रीय तेलंगाना भावना से गहरा जुड़ाव महसूस करते हैं।

भविष्य की राजनीतिक चुनौतियां
इस घटनाक्रम को तेलंगाना की सियासत में एक बड़े उलटफेर के तौर पर देखा जा रहा है। एक बेटी का अपने ही पिता की स्थापित राजनीतिक विरासत के खिलाफ यूं नई पार्टी बनाकर चुनौती पेश करना राज्य में चर्चा का मुख्य विषय बन गया है। BRS पहले से ही राज्य में कई चुनौतियों का सामना कर रही है, और अब घर के भीतर से उठी यह बगावत पार्टी के लिए मुश्किलें बढ़ा सकती है।

अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या के. कविता की यह नई ‘TRS’ पार्टी अपने पिता के वोट बैंक में सेंध लगाने में कामयाब हो पाएगी। के. कविता के इस साहसिक कदम ने तेलंगाना के राजनीतिक मैदान में एक नए अध्याय की शुरुआत कर दी है, जिसके दूरगामी परिणाम आगामी चुनावों में देखने को मिल सकते हैं।

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