मई 2023 से जातीय हिंसा के कारण 58,800 से अधिक लोग हुए विस्थापित: मणिपुर सरकार

मणिपुर सरकार के अनुसार, 3 मई 2023 से इस वर्ष 30 मार्च तक राज्य में हुई जातीय हिंसा के कारण कुल 58,821 लोग विस्थापित हुए हैं। यह आंकड़े 20 अप्रैल को गृह विभाग सचिवालय द्वारा मणिपुर कांग्रेस नेता हरेश्वर गोस्वामी द्वारा दायर एक आरटीआई (RTI) के जवाब में प्रस्तुत किए गए थे।
मणिपुर में जातीय हिंसा मई 2023 में घाटी में रहने वाले मैतेई समुदाय और पहाड़ी जिलों में रहने वाले कुकी समुदाय के बीच भड़की थी। मणिपुर में मई 2023 से जारी हिंसा के पीछे कोई एक कारण नहीं, बल्कि कई धार्मिक, भौगोलिक और राजनीतिक कारकों का एक जटिल मिश्रण है।
मणिपुर हिंसा की वजह की बात करें तो सबसे बड़ा और तात्कालिक कारण मैतेई (Meitei) समुदाय द्वारा अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिए जाने की मांग थी।
दरअसल मणिपुर उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह मैतेई समुदाय को ST श्रेणी में शामिल करने की मांग पर विचार करे।
विरोध: पहाड़ी इलाकों में रहने वाले कुकी और नगा समुदायों ने इसका कड़ा विरोध किया। उन्हें डर था कि अगर मैतेई (जो पहले से ही जनसंख्या और राजनीति में मजबूत हैं) को ST दर्जा मिल गया, तो वे उनकी ज़मीनों पर कब्ज़ा कर लेंगे और सरकारी नौकरियों में मिलने वाला आरक्षण कम हो जाएगा।
इसी विरोध में 3 मई 2023 को ‘ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन मणिपुर’ (ATSUM) ने एक ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ निकाला, जिसके दौरान हिंसा भड़क गई।
मणिपुर की बनावट ऐसी है कि वहां ज़मीन और जनसंख्या के बीच बड़ा अंतर है। राज्य का 10% हिस्सा घाटी (Imphal Valley) है जहाँ लगभग 65% आबादी (मुख्यतः मैतेई) रहती है। बाकी 90% हिस्सा पहाड़ी है जहाँ 35% आदिवासी आबादी (कुकी और नगा) रहती है। मौजूदा कानूनों के अनुसार, पहाड़ी आदिवासी घाटी में ज़मीन खरीद सकते हैं, लेकिन घाटी में रहने वाले गैर-आदिवासी (मैतेई) पहाड़ों में ज़मीन नहीं खरीद सकते। मैतेई समुदाय इसे अपने साथ भेदभाव मानता है।
अवैध घुसपैठ और ‘आरक्षित वन’ विवाद :
म्यांमार से घुसपैठ: सरकार और मैतेई संगठनों का आरोप है कि म्यांमार में तख्तापलट के बाद बड़ी संख्या में अवैध कुकी शरणार्थी मणिपुर आए और जंगलों में बस गए।
बेदखली अभियान: राज्य सरकार ने आरक्षित वन क्षेत्रों (Reserved Forests) से अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया, जिसे कुकी समुदाय ने अपने पारंपरिक अधिकारों पर हमला और उन्हें निशाना बनाने की साजिश माना।



