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अश्वगंधा के इस्तेमाल पर FSSAI का नया फरमान

फूड सप्लीमेंट्स में अब सिर्फ 'जड़ों' और 'अर्क' के उपयोग को ही मिलेगी मंजूरी

आयुर्वेद में ‘जड़ी-बूटियों का राजा’ माने जाने वाले अश्वगंधा (Ashwagandha) को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक बेहद अहम एडवाइजरी जारी की है। स्वास्थ्य और फिटनेस के प्रति बढ़ती जागरूकता के बीच आज बाजार में अश्वगंधा युक्त उत्पादों की बाढ़ सी आ गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए, देश की शीर्ष खाद्य नियामक संस्था ने कड़े कदम उठाते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि अब व्यावसायिक खाद्य उत्पादों (Food Products) में अश्वगंधा के केवल कुछ विशिष्ट हिस्सों का ही इस्तेमाल किया जा सकेगा।

क्या है FSSAI का नया निर्देश?
21 अप्रैल को जारी इस नई और विस्तृत गाइडलाइन के अनुसार, फूड सप्लीमेंट्स और अन्य संबंधित खाद्य पदार्थों के निर्माण में अब अश्वगंधा (जिसका वैज्ञानिक नाम विथानिया सोम्निफेरा – Withania somnifera है) की केवल ‘जड़ों’ (Roots) और जड़ों के ‘अर्क’ (Extract) के उपयोग को ही आधिकारिक अनुमति दी गई है। इसका सीधा मतलब यह है कि उत्पादक कंपनियां अब अपने उत्पादों में अश्वगंधा के पत्तों (Leaves) या तनों का इस्तेमाल मनमाने ढंग से नहीं कर पाएंगी।

किन उत्पादों पर लागू होगा नियम?
FSSAI ने यह एडवाइजरी मुख्य रूप से चार कैटेगरी के लिए जारी की है:
1. हेल्थ सप्लीमेंट्स (Health Supplements)
2. न्यूट्रास्यूटिकल्स (Nutraceuticals)
3. विशेष आहार उपयोग के लिए भोजन (Food for Special Dietary Use – FSDU)
4. विशेष चिकित्सा उद्देश्यों के लिए खाद्य पदार्थ (FSMP)

यह कदम ‘खाद्य सुरक्षा और मानक विनियम’ (Food Safety and Standards Regulations) के तहत उठाया गया है, ताकि उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद मिल सकें और उनके स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का कोई खिलवाड़ न हो।

इस बड़े फैसले की जरूरत क्यों पड़ी?
दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में, खासकर कोरोना महामारी के बाद से, इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) बढ़ाने और तनाव (Stress) कम करने के लिए अश्वगंधा की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। बाजार में कई कंपनियां अश्वगंधा के नाम पर महंगे पाउडर, कैप्सूल, गोलियां और एनर्जी ड्रिंक्स बेच रही हैं।

आयुर्वेद के जानकारों और वैज्ञानिक शोधों का मानना है कि अश्वगंधा के असली औषधीय गुण और सक्रिय तत्व (Active Compounds) मुख्य रूप से उसकी जड़ों में ही पाए जाते हैं। लेकिन कई बार अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में कुछ निर्माता सस्ती लागत के लिए पत्तियों और पौधे के अन्य हिस्सों का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे थे। पत्तियों का उपयोग मुख्य रूप से बाहरी लेप या कुछ विशिष्ट आयुर्वेदिक औषधियों में होता है, लेकिन आम फूड सप्लीमेंट में इसके सेवन से उपभोक्ताओं को वह लाभ नहीं मिलता जिसके लिए वे पैसे खर्च कर रहे हैं। FSSAI का यह कदम इसी मिलावट और भ्रामक व्यापार पर रोक लगाने के लिए है।

इंडस्ट्री और उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर?
FSSAI के इस ताजा निर्देश के बाद, न्यूट्रास्यूटिकल और फूड सप्लीमेंट इंडस्ट्री को अपने उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया में बड़े बदलाव करने होंगे। कंपनियों को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके लेबल्स पर दी गई जानकारी पूरी तरह से पारदर्शी हो।

वहीं, उपभोक्ताओं के लिए भी इसके बड़े मायने हैं। अब बाजार से अश्वगंधा खरीदते समय ग्राहकों को पैकेट पर दी गई ‘सामग्री सूची’ (Ingredients List) को ध्यान से पढ़ना चाहिए और देखना चाहिए कि उसमें स्पष्ट रूप से ‘Ashwagandha Root Extract’ (अश्वगंधा की जड़ का अर्क) लिखा है या नहीं।

संक्षेप में कहें तो, FSSAI का यह फैसला आम जनता के लिए एक बड़ी राहत है। इससे न केवल बाजार में मिलने वाले अश्वगंधा उत्पादों की शुद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित होगी, बल्कि लोगों को भ्रामक दावों से भी बचाया जा सकेगा। यह कदम यह प्रमाणित करता है कि भारत में स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों के तेजी से बढ़ते बाजार को अब अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जा रहा है।

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