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पीएम मोदी पर ‘आतंकवादी’ वाली टिप्पणी पड़ी भारी

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को चुनाव आयोग का नोटिस, गरमाई सियासत

देश में जारी चुनावी सरगर्मी के बीच नेताओं की बयानबाजी अब व्यक्तिगत और बेहद तीखे स्तर पर पहुंच गई है। इसी कड़ी में, देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई एक बेहद तल्ख और विवादित टिप्पणी को लेकर भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने बुधवार को कड़ा संज्ञान लिया है। आयोग ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) को ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) जारी कर दिया है, जिसके बाद दिल्ली से लेकर राज्यों तक का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।

विवाद की जड़: खरगे की वो ‘विवादित टिप्पणी’
चुनावी रैलियों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर आम है, लेकिन यह विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने एक हालिया भाषण में सारी भाषाई मर्यादाएं लांघ दीं। रिपोर्ट के अनुसार, खरगे ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा और व्यक्तिगत हमला करते हुए उनके लिए कथित तौर पर ‘आतंकवादी’ (Terrorist) शब्द का इस्तेमाल किया।

एक लोकतांत्रिक देश के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति के लिए विपक्ष के सबसे बड़े नेता द्वारा इस तरह की शब्दावली का प्रयोग होते ही बड़ा बवाल मचना तय था। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे तुरंत लपक लिया और खरगे के इस बयान को देश के प्रधानमंत्री का ही नहीं, बल्कि पूरी जनता का अपमान बताते हुए चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया।

चुनाव आयोग का सख्त एक्शन और आचार संहिता का सवाल
भाजपा की शिकायत और मामले की गंभीरता को देखते हुए चुनाव आयोग ने बुधवार (22 अप्रैल) को तुरंत एक्शन लिया। आयोग ने खरगे को आधिकारिक नोटिस थमाते हुए उनके इस आपत्तिजनक बयान पर जवाब तलब किया है।

चुनाव आयोग का यह कदम एक स्पष्ट संदेश है कि आदर्श चुनाव आचार संहिता (Model Code of Conduct) का उल्लंघन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, राजनीतिक दलों और उनके नेताओं को चुनाव प्रचार के दौरान अपने प्रतिद्वंद्वियों पर व्यक्तिगत हमले करने या असंसदीय भाषा का उपयोग करने से सख्त मनाही होती है। आयोग ने कांग्रेस अध्यक्ष से स्पष्टीकरण मांगा है कि क्यों न उनके इस अमर्यादित आचरण के लिए उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

सियासी घमासान: भाजपा आक्रामक, कांग्रेस बैकफुट पर
इस नोटिस के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है। भाजपा के दिग्गज नेताओं ने इसे कांग्रेस की ‘बौखलाहट और हताशा’ का प्रतीक बताया है। भाजपा का तर्क है कि जब-जब विपक्ष के पास जमीन पर कोई ठोस मुद्दा नहीं होता, तब-तब उसके नेता प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ गालियों और अपशब्दों का सहारा लेने लगते हैं, जिसका जवाब जनता हर बार वोट की चोट से देती है।

दूसरी ओर, इस नोटिस के बाद कांग्रेस खेमे में हलचल तेज है। पार्टी के रणनीतिकार अब इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि चुनाव आयोग के इस नोटिस का क्या कानूनी और राजनीतिक जवाब दिया जाए। हालांकि, चुनाव के इस नाजुक मोड़ पर ऐसे विवाद पार्टी के लिए एक ‘सेल्फ गोल’ भी साबित हो सकते हैं, जो असल जन-मुद्दों से ध्यान भटकाते हैं।

मल्लिकार्जुन खरगे को मिला यह नोटिस केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह हमारे राजनीतिक विमर्श (Political Discourse) के लगातार गिरते स्तर पर एक बड़ा और गंभीर सवाल खड़ा करता है। चुनाव एक स्वस्थ लोकतंत्र का उत्सव हैं, जहां नीतियों पर बहस होनी चाहिए, न कि नेताओं के बीच व्यक्तिगत गालियों की जंग। अब पूरे देश और राजनीतिक पंडितों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष इस नोटिस का क्या जवाब देते हैं और चुनाव आयोग आगे क्या सख्त कदम उठाता है।

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